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कोरोना ग्रसित परिवारों की बिल प्रतिपूर्ति हेतु सुप्रीम कोर्ट की संयुक्त पीठ ने सभी राज्यों को किया जवाब तलब 4 सप्ताह में जवाब दाखिल करने के आदेश

भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी

भारत के 1 करोड़ से अधिक कोरोना ग्रसित परिवारों की बिल प्रतिपूर्ति हेतु जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को किया जवाब तलब।

पिछले दिनों पूरे भारत मे कोरोना महामारी ने अपने पैर पसार रखे थे जिससे कोई भी अछूता नहीं रहा है। भले ही कोरोना का कहर अब कम हो गया हो किन्तु पूरे देश में इसने अपने चरम पर दोनों-लहरों में त्राहिमाम मचाया और लाखों लोगों जा जीवन बर्बाद कर दिया।  अबतक भारत मे 3.42 करोड़ लोगों को कोरोनो हुआ जोकि पूरे विश्व मे चिंताजनक पहले स्थान पर है। कोरोना से लोगो को जान-माल हानि के साथ-साथ आर्थिक मार भी झेलनी पड़ी है ।  भारत के मध्यम- वर्ग और निचले वर्ग के 90 % प्रतिशत आबादी के कई लोगों की नौकरियां-व्यापार पर खतरा मंडराया,  तब भी उन्होंने अपने परिवार वालो को बचाने के लिये प्राइवेट हस्पतालों में अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया ।

कोरोनाकाल में केंद्र सरकार द्वारा जून 2020 में प्राइवेट अस्पतालों के कोरोना मरीजों हेतु चार्ज सुनिश्चित किया गया था किन्तु फिर भी कई राज्यो के मरीजों से लाखों रुपये के बिल वसूले गये।
इन सबके दृष्टिगत देश में कोरोना मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों द्वारा अत्यधिक ख़र्च की प्रतिपूर्ति आमजन को प्राइवेट अस्पतालों से पैसे वापसी के लिये देहरादून निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अभिनव थापर की सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली में सुनवाई चल रही है जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा था।

उल्लेखनीय है कि गाइडलाइंस में कोरोना मरीजों हेतू प्राइवेट अस्पतालों में यह चार्ज प्रतिदिन का निर्धारित था, ऑक्सिजन बेड- 8-10 हजार रुपये, आई०सी०यू०- 13-15 हजार रुपये व वेंटिलेटर बेड- 18 हजार रुपये , जिसमे PPE किट, दवाइयां, बेड, जाँच इत्यादि सब ख़र्चे युक्त थे किन्तु फिर भी कई राज्यो के मरीजों से लाखों रुपये के बिल वसूले गये, इन सबके दृष्टिगत देश में कोरोना मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों द्वारा अत्यधिक ख़र्च की प्रतिपूर्ति आमजन को प्राइवेट अस्पतालों से पैसे वापसी के लिये उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर करी जिससे भारत के लगभग 1 करोड़ कोरोनो पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके। सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीशों वाली संयुक्त पीठ ने जनहित याचिका का संजान लिया व केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब दाखिल करने के आदेश दिए।
जनहित याचिका के अधिवक्ता दीपक कुमार शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ व न्यायमूर्ति बोपन्ना की संयुक्त पीठ ने इस याचिका के अत्याधिक बिल चार्ज के विषय मे गंभीर चिंता व्यक्त की तथा प्राइवेट हॉस्पिटल के अत्याधिक बिल चार्ज करने की अनियमिताओं मरीजों को रिफंड जारी करने व पूरे देश के लिये सुनिश्चित गाइडलाइंस जारी करने विषय मे स्वास्थ्य मंत्रालय, केंद्र सरकार के साथ-साथ अब सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवम्बर को सभी राज्यों को भी 4 सप्ताह में जवाब तलब करने का आदेश कर दिया है।
ग़ौरतलब हैं कि इस विषय पर अभिनव थापर व उनके साथियों द्वारा एक अभियान (लड़ाई अभी बाकी है – हिसाब अभी बाकी है) भी चलाया जा रहा है जिससे लोगों को जागरूक कर उनके बिल एकत्रित कर उनके बिल प्रतिपूर्ति का विषय सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाया जाएगा।
कोरोना बिल एकत्रित अभियान –
लड़ाई अभी बाकी है – हिसाब अभी बाकी है की हेल्पलाइन-
उत्तराखंड के सभी कोरोना पीड़ितों के लिये हेल्पलाइन नम्बर व ईमेल जारी किया, जिसपे कोई भी निवासी अपने या अपने दोस्त/रिश्तेदारों/जानकारों के private हॉस्पिटल, दवाई के बिल, कोरोना की रिपोर्ट व डिस्चार्ज summary – whatsapp या ईमेल कर सकते है:

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