एक्सक्लूसिव

कोविड-19संबंधित हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं हो रहा जिला न्यायालय देहरादून में,अध्यक्ष सचिव बार दून

भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी 

देहरादून बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल और सचिव अनिल कुमार शर्मा ने प्रभारी जिला जज देहरादून को हाईकोर्ट नैनीताल के दिशा निर्देशों का पालन ना होने संबंधी पत्र लिखा हैं, कि कोविड-19 से संबंधित हाई कोर्ट नैनीताल के निर्देशों का पालन जिला देहरादून के न्यायालय परिसर में बिल्कुल भी गंभीरता पूर्वक नहीं हो रहा है,जबकि उच्च न्यायालय नैनीताल द्वारा स्पष्ट दिशा निर्देश दिए गए थे कि शौचालय एवं न्यायालयों में सैनिटाइजेशन होगा एवं न्यायालय में प्रवेश करने पर उनका मशीन द्वारा तापमान नापा जाएगा लेकिन इन निर्देशों का कोई पालन नही हो रहा है, परंतु न्यायालय के अंदर इतनी अधिक भीड़ हो रही है कि कोविड से बचने में भी परेशानी हो रही है लोअर कोर्ट तो इतनी छोटी है कि अगर वहां पर कोई कोविड संक्रमित वाला आ गया तो बचना मुश्किल होगा ।


जिला न्यायालय में कार्य भी उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देश के हिसाब से नहीं हो रहा है न्यायालय में कार्य करते हुए कोई अधिवक्ता कोरोना पॉजिटिव हो गया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा और न्यायालय में काम शुरू होने के कारण न्यायालय परिसर में रोजाना 10 से 15 हज़ार लोग इकट्ठे हो रहे हैं साथ ही जिला न्यायालय के साथ एक ही प्रांगण में कलेक्ट्रेट दो बैंक पोस्ट ऑफिस, एसपी सिटी, एसपी ट्रैफिक, पीडब्ल्यूडी सैनिक विश्राम गृह एवं ट्रेजरी कार्यालय साथ साथ हैं इसलिए किसी को भी कोविड हो गया तो हालात बद से बदतर हो जाएंगे और ना तो संपूर्ण न्यायालय में सैनिटाइजेशन का कार्य हो रहा है और ना ही न्यायालय परिसर के प्रवेश एवं निषेध द्वार पर किसी भी प्रकार की थर्मल स्कैनिंग हो रही है ।
उच्चतम न्यायालय/उच्च न्यायालय द्वारा कोविड महामारी के संबंध में दिनांक 31-12-2020 को निम्न दिशा निर्देश जारी किए गए थे-
उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों के अनुसार न्यायालय परिसर में केवल अधिवक्ता व वादकारी व गवाहों का ही प्रवेश होगा परंतु वास्तविक धरातल पर ऐसी स्थिति बनी हुई है कि उपयुक्त व्यक्तियों के अलावा अन्य व्यक्तियों की भी आवाजाही बनी हुई है।
न्यायालय परिसर में बैठने की व्यवस्था चाहे वह न्यायालय के भीतर हो या बाहर हो ऐसी नहीं है कि जिससे सामाजिक दूरी का पालन किया जा सके।
उच्च न्यायालय द्वारा यह दिशा निर्देश भी है कि न्यायालय परिसर में मौजूद सभी व्यक्तियों का मास्क पहनना अनिवार्य है परंतु इस पर भी किसी प्रकार का अंकुश नहीं है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक व्यक्ति मास्क पहनकर ही न्यायालय परिसर में प्रवेश करें, इसके अतिरिक्त यह दिशा निर्देश भी हैं कि कोई भी व्यक्ति न्यायालय परिसर में गंदगी खासकर थूकेगा नहीं ।
उच्च न्यायालय द्वारा सार्वजनिक शौचालय को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए गए जिसमें स्पष्ट रूप से यह कहा कि शौचालय पूर्ण रूप से स्वच्छ एवं सैनिटाइज हो।
उपरोक्त दिशा निर्देशों का पालन करने हेतु एक कमेटी का गठन करने हेतु भी न्यायालय द्वारा कहा गया था था परंतु उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों का गंभीरता पूर्वक वास्तविक धरातल पर पालन होता दिखाई नहीं दे रहा है जिससे कि अधिवक्ताओं और वादकारियों का जीवन संकट में दिखाई प्रतीत हो रहा है।