श्रद्धा और भक्ति के बीच हेमकुंड साहिब के कपाट बंद, गुरु ग्रंथ साहिब को सचखंड पहुंचाया

-पाकिस्तान से आए 48 तीर्थयात्रियों सहित देश-विदेश के श्रद्धालु हुए समारोह में शामिल
देहरादून। सिखों के पवित्र तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब के कपाट श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक परंपराओं के बीच शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के पावन अवसर पर आयोजित समारोह में देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने मत्था टेककर अरदास की। इस दौरान ‘बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयकारों से पूरा तीर्थ परिसर गूंज उठा। धार्मिक परंपराओं के अनुरूप श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को सम्मानपूर्वक शोभायात्रा के साथ उनके शीतकालीन निवास सचखंड ले जाया गया।
समारोह का शुभारंभ सुखमनी साहिब के पाठ से हुआ। इसके पश्चात श्री दरबार साहिब, अमृतसर के हजूरी रागी सिंह गुरदियाल सिंह एवं उनके जत्थे ने शबद-कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को भक्तिरस में सराबोर किया। इसके बाद यात्रा की अंतिम अरदास की गई और गुरु महाराज को सत्कार सहित सचखंड ले जाने की प्रक्रिया संपन्न हुई।
गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन सरदार नरिंदरजीत सिंह बिंद्रा ने यात्रा को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, भारतीय सेना, राज्य सरकार और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से पुलिस और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के जवानों की सराहना करते हुए कहा कि पूरी यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
चेयरमैन ने गुरुद्वारों में सेवाएं देने वाले सेवादारों और कर्मचारियों के योगदान की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सेवादारों की निष्ठा, समर्पण और परिश्रम के कारण ही इतनी बड़ी धार्मिक यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हो सकी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि रतूड़ा गुरुद्वारा अब संगत के लिए खुल चुका है।
ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सरदार सेवा सिंह ने भी सभी गुरुद्वारों में श्रद्धालुओं की ओर से मिले सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि संगत के अनुशासन, सहयोग और सेवा भावना ने यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने में अहम योगदान दिया।
देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु
इस वर्ष श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा में विश्वभर से श्रद्धालु पहुंचे। संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, यूरोप, मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर और दुबई सहित विभिन्न देशों से आए तीर्थयात्रियों ने पवित्र गुरुद्वारे में मत्था टेका। समारोह का विशेष आकर्षण पाकिस्तान से आए 48 तीर्थयात्रियों का जत्था रहा, जिसने पवित्र स्थल के दर्शन किए और कपाट बंद होने के ऐतिहासिक धार्मिक अवसर का साक्षी बना।
प्रतिकूल मौसम में भी उमड़ा आस्था का सैलाब
क्षेत्र में हल्की बर्फबारी शुरू होने और मौसम के प्रतिकूल होने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखाई दी। कपाट बंद होने के दिन लगभग पांच हजार श्रद्धालु श्री हेमकुंड साहिब पहुंचे और गुरु महाराज के समक्ष शीश नवाकर प्रार्थना की। कपाट बंद होने के साथ ही इस वर्ष की हेमकुंड साहिब यात्रा का समापन हो गया है। अब श्रद्धालुओं को अगले ग्रीष्मकाल का इंतजार रहेगा, जब वर्ष 2027 में यात्रा दोबारा शुरू होगी।




