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उत्तराखंड के लोकसभा सांसदों की निधि खर्च महज 10 प्रतिशत, राज्यसभा सांसदों ने खर्च किए 26 प्रतिशत

देहरादून। उत्तराखंड के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को आवंटित सांसद निधि के इस्तेमाल में खासी सुस्ती सामने आई है। जून 2026 तक राज्य के आठ सांसदों को आवंटित कुल 135.95 करोड़ रुपये में से केवल करीब 18 प्रतिशत धनराशि ही खर्च हो सकी है। इसमें पूर्ण हो चुके और वर्तमान में चल रहे कार्यों पर खर्च राशि शामिल है। वहीं सांसदों की ओर से प्रस्तावित 215 कार्यों को अधिकारियों ने अभी तक स्वीकृति नहीं दी है, जबकि स्वीकृत कार्यों में से 154 कार्य जून 2026 तक शुरू ही नहीं हो सके।

यह खुलासा सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत ग्राम्य विकास आयुक्त, उत्तराखंड के कार्यालय से उपलब्ध कराई गई सूचना से हुआ है। आरटीआई कार्यकर्ता नदीम उद्दीन एडवोकेट ने सांसद निधि के खर्च से संबंधित जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में लोक सूचना अधिकारी एवं उपायुक्त प्रशासन हेमंती गुंजियाल ने पत्रांक 319762 के माध्यम से जून 2026 तक का सांसद निधि खर्च विवरण उपलब्ध कराया।

135.95 करोड़ रुपये की निधि आवंटित

आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार जून 2026 तक उत्तराखंड के आठ सांसदों को कुल 135.95 करोड़ रुपये की सांसद निधि आवंटित हुई। इसमें पांच लोकसभा सांसदों को 73.50 करोड़ रुपये और तीन राज्यसभा सांसदों को 62.45 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

सांसदों के वर्तमान कार्यकाल में जून 2026 तक पूर्ण कार्यों पर 12.81 करोड़ रुपये तथा चल रहे कार्यों पर 11.31 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इस तरह कुल खर्च करीब 24.12 करोड़ रुपये रहा, जो आवंटित निधि का लगभग 18 प्रतिशत है।

लोकसभा सांसदों की बात करें तो पांच सांसदों को आवंटित 73.50 करोड़ रुपये में से पूर्ण कार्यों पर 5.769 करोड़ रुपये और चल रहे कार्यों पर 1.90 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यह कुल आवंटित निधि का करीब 10 प्रतिशत है। वहीं तीन राज्यसभा सांसदों की निधि में से पूर्ण कार्यों पर 7.04 करोड़ रुपये और चल रहे कार्यों पर 9.41 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जो कुल आवंटित निधि का करीब 26 प्रतिशत है।

लोकसभा सांसदों में माला राज लक्ष्मी शाह सबसे आगे

सांसदवार खर्च के मामले में लोकसभा सांसदों में टिहरी गढ़वाल सांसद माला राज लक्ष्मी शाह सबसे आगे हैं। उनकी सांसद निधि से जून 2026 तक 4.08 करोड़ रुपये, यानी करीब 28 प्रतिशत राशि खर्च हुई है।

दूसरे स्थान पर नैनीताल-उधमसिंह नगर सांसद अजय भट्ट हैं, जिन्होंने 1.79 करोड़ रुपये, यानी करीब 12 प्रतिशत निधि खर्च की है। हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 1.499 करोड़ रुपये, यानी करीब 10 प्रतिशत खर्च किए हैं। अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा की निधि से 0.17 करोड़ रुपये, यानी करीब एक प्रतिशत राशि खर्च हुई है। वहीं गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी की जून 2026 तक सांसद निधि का खर्च शून्य दर्शाया गया है।

राज्यसभा में नरेश बंसल आगे

राज्यसभा सांसदों में नरेश बंसल सबसे अधिक निधि खर्च करने वाले सांसद हैं। उनकी ओर से जून 2026 तक 10.96 करोड़ रुपये, यानी करीब 40 प्रतिशत राशि खर्च की गई है। दूसरे स्थान पर कल्पना सैनी हैं, जिनकी निधि से 4.356 करोड़ रुपये, यानी करीब 22 प्रतिशत खर्च हुआ है। महेन्द्र भट्ट की ओर से 1.139 करोड़ रुपये, यानी करीब आठ प्रतिशत राशि खर्च दर्शाई गई है।

अजय भट्ट ने प्रस्तावित किए 327 कार्य

आरटीआई से मिली सांसदवार जानकारी के अनुसार नैनीताल-उधमसिंह नगर सांसद अजय भट्ट ने अपने वर्तमान कार्यकाल में सांसद निधि से 327 कार्य प्रस्तावित किए। इनमें से 260 कार्य स्वीकृत हुए। स्वीकृत कार्यों में 56 पूर्ण, 183 कार्य प्रगति पर और 21 कार्य शुरू नहीं हो सके हैं।

टिहरी सांसद माला राज लक्ष्मी शाह ने 184 कार्य प्रस्तावित किए, जिनमें से 167 स्वीकृत हुए। इनमें 80 कार्य पूर्ण, 74 प्रगति पर और 13 कार्य शुरू नहीं हुए।

गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने कुल नौ कार्य प्रस्तावित किए। इनमें तीन स्वीकृत हुए। तीन कार्य पूर्ण बताए गए हैं, जबकि तीन कार्य प्रगति पर हैं। एक कार्य के शुरू न होने का भी उल्लेख विवरण में है।

अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा की ओर से 59 कार्य प्रस्तावित किए गए, जिनमें 35 स्वीकृत हुए। विवरण में तीन कार्य शुरू नहीं होने और 29 कार्य प्रगति पर होने की जानकारी दी गई है।

हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 137 कार्य प्रस्तावित किए, जिनमें से 31 कार्य अधिकारियों ने स्वीकृत किए। इनमें 20 कार्य पूर्ण और 11 कार्य प्रगति पर हैं।

राज्यसभा सांसदों के कार्यों की स्थिति

राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने 280 कार्य प्रस्तावित किए, जिनमें से 231 स्वीकृत हुए। इनमें 39 कार्य पूर्ण, 118 प्रगति पर और 74 कार्य जून 2026 तक शुरू नहीं हुए।

कल्पना सैनी ने 140 कार्य प्रस्तावित किए, जिनमें से 106 स्वीकृत हुए। इनमें 48 कार्य पूर्ण, 54 प्रगति पर और चार कार्य शुरू नहीं हुए।

वहीं महेन्द्र भट्ट ने 87 कार्य प्रस्तावित किए, जिनमें से 71 स्वीकृत हुए। इनमें 10 कार्य पूर्ण, 23 प्रगति पर और 38 कार्य जून 2026 तक शुरू नहीं हो सके।

आरटीआई कार्यकर्ता नदीम उद्दीन एडवोकेट के अनुसार सांसद निधि का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर जनोपयोगी विकास कार्यों को गति देना है। ऐसे में बड़ी संख्या में प्रस्तावित कार्यों के लंबित रहने और स्वीकृत कार्यों का समय पर शुरू न होना सांसद निधि के प्रभावी उपयोग पर सवाल खड़े करता है।

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