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सांसद त्रिवेंद्र ने युवाशक्ति और नवाचार को बताया प्रगति का आधार, डॉ. निशंक ने प्रकृति, संस्कृति और विकास के समन्वय पर दिया बल

-युवा चेतना, सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति संरक्षण के समन्वय से बनेगा विकसित उत्तराखंड : लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में प्रबुद्धजनों का आह्वान

देहरादून। लेखक गाँव, थानों में आयोजित लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव–2026 के चतुर्थ दिवस पर ‘युवा उत्तराखंड : नई सोच, नई चेतना’ विषय पर आयोजित सत्र में प्रदेश के भविष्य, युवा नेतृत्व, सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण और नवाचार की संभावनाओं पर सार्थक विमर्श हुआ। वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड की प्रगति का मार्ग युवाओं की रचनात्मक ऊर्जा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव के समन्वय से प्रशस्त होगा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार के लोकसभा सांसद  त्रिवेंद्र सिंह रावत रहे। मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति  पृथ्वीराज सिंह रूपन, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी तथा उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने विचार व्यक्त किए। लेखक गाँव की निदेशक  विदुषी निशंक ने अतिथियों का स्वागत किया।

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति और उसके भविष्य की दिशा तय करने वाली पीढ़ी हैं। सकारात्मक सोच, नवाचार और परिश्रम के साथ उत्तराखंड का युवा प्रदेश को विकास की नई ऊँचाइयों तक ले जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता, औषधीय वनस्पतियों और प्राकृतिक संपदा में रोजगार एवं उद्यमिता की व्यापक संभावनाएँ हैं। स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए आजीविका के अवसर सृजित किए जाने चाहिए। अल्मोड़ा के युवाओं द्वारा फ्लाइंग कार के निर्माण का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रदेश की युवा प्रतिभा और तकनीकी नवाचार की क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने संस्कृति को समाज को जोड़ने वाली शक्ति बताते हुए युवाओं से अपनी जड़ों से जुड़े रहने का आह्वान किया।

मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति  पृथ्वीराज सिंह रूपन ने उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक समृद्धि की सराहना करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और संस्कारों से जोड़ना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लेखक गाँव को युवाओं के बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विकास और अंतरराष्ट्रीय संवाद का महत्त्वपूर्ण मंच बताते हुए महोत्सव की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी ने कहा कि विकास की सार्थकता आर्थिक प्रगति के साथ संस्कृति और पर्यावरण के संरक्षण में निहित है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्रियों डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ और त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकालों का उल्लेख करते हुए प्रदेश की विकास यात्रा पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि साहित्य और संस्कृति मनुष्य, विज्ञान तथा प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करने के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने ‘युवा उत्तराखंड : नई सोच, नई चेतना’ को प्रदेश के भविष्य से जुड़ा महत्त्वपूर्ण संकल्प बताते हुए युवाओं से आत्मनिर्भर, समृद्ध और पर्यावरण-संवेदनशील उत्तराखंड के निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस दशक को उत्तराखंड का दशक बताए जाने के अनुरूप प्रदेश की संभावनाओं को साकार करना हम सभी का दायित्व है। उत्तराखंड देवभूमि होने के साथ वीरभूमि भी है, जिसकी पहचान हिमालय, प्राकृतिक संपदा, आध्यात्मिक परंपराओं और समृद्ध लोकसंस्कृति से है।

डॉ. निशंक ने कहा कि विकास का उद्देश्य केवल भौतिक अवसंरचना का विस्तार नहीं, बल्कि रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्थानीय आजीविका और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना भी है। आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और औषधीय वनस्पतियों के क्षेत्र में उत्तराखंड की विशिष्ट संभावनाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान एवं आधुनिक तकनीक से जोड़कर युवाओं के लिए नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

उन्होंने चिपको आंदोलन और गौरा देवी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति में प्रकृति संरक्षण की भावना गहराई से रची-बसी है। यहाँ की महिलाओं ने वृक्षों की रक्षा के लिए जिस साहस और संवेदनशीलता का परिचय दिया, वह विश्व के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति सम्मान, सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण और आधुनिक ज्ञान का समावेश ही विकास को स्थायी एवं जनकल्याणकारी बना सकता है। शिक्षा का उद्देश्य भी केवल रोजगार तक सीमित नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास होना चाहिए।

लेखक गाँव की निदेशक विदुषी निशंक ने कहा कि लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव साहित्य, कला और संस्कृति के माध्यम से देश-विदेश के विचारों को जोड़ने वाला सशक्त मंच बन रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को रचनात्मक अभिव्यक्ति के अवसर प्रदान करने के साथ उनमें सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सहभागिता विकसित करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा यहाँ से नई दृष्टि और प्रेरणा लेकर प्रदेश एवं राष्ट्र की प्रगति में योगदान देंगे। महोत्सव में भारत के विभिन्न राज्यों और लगभग 60 देशों से जुड़े प्रतिभागियों एवं विद्यार्थियों की सहभागिता रही। सत्र में विद्वानों, साहित्यकारों, युवा लेखकों और संस्कृतिप्रेमियों ने भाग लिया। विमर्श का निष्कर्ष रहा कि उत्तराखंड का उज्ज्वल भविष्य ऐसी युवा चेतना में निहित है, जो नवाचार को अपनाए, सांस्कृतिक विरासत को सँजोए और प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित करते हुए विकास की नई राह बनाए।

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