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सूचना आयोग के आदेश की अवहेलना पर सूचना आयुक्त दिलीप सिंह कुंवर नेकलेक्ट्रेट देहरादून की वरिष्ठ सहायक (शस्त्र) रजनी नेगी पर ₹10 हजार का जुर्माना

आयोग ने भ्रामक एवं अपूर्ण सूचना देने को माना आरटीआई अधिनियम का गंभीर उल्लंघन, 15 दिन में सूचना न देने पर हुई कार्रवाई

*सूचना आयोग के आदेश की अवहेलना पर कलेक्ट्रेट देहरादून की वरिष्ठ सहायक (शस्त्र) रजनी नेगी पर ₹10 हजार का जुर्माना*

देहरादून:नेहरू कॉलोनी निवासी सरदार रणजीत सिंह द्वारा दिनांक 21 अक्टूबर 2024 को लोक सूचना अधिकारी, कलेक्ट्रेट देहरादून से शस्त्र लाइसेंस धारकों एवं संबंधित शासनादेशों से जुड़ी 6 बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी गई थीं।

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आरोप है कि विभाग द्वारा पूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके बाद प्रथम अपील के पश्चात मामला राज्य सूचना आयोग उत्तराखंड में द्वितीय अपील के रूप में प्रस्तुत किया गया।

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मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त दिलीप सिंह कुंवर ने लोक सूचना अधिकारी को निर्देशित किया था कि बिंदु संख्या 01 में शस्त्र अधिनियम के टी०एल० / जी०एल० से संबंधित पृष्ठों की प्रमाणित प्रतियां तथा बिंदु संख्या 05 एवं 06 की पूर्ण सूचना 15 दिन के भीतर अपीलार्थी को पंजीकृत डाक से निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया था कि सूचना उपलब्ध न कराने की स्थिति में अपीलार्थी सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 18 के अंतर्गत शिकायत दर्ज करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

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निर्धारित समयावधि में सूचना प्राप्त न होने पर शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 09 अक्टूबर 2025 को पुनः आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत की सुनवाई में आयोग ने पाया कि लोक सूचना अधिकारी / मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, कलेक्ट्रेट देहरादून द्वारा समतुल्य लोक सूचना अधिकारी रजनी नेगी, वरिष्ठ सहायक (शस्त्र), कलेक्ट्रेट देहरादून से प्राप्त जो सूचना उपलब्ध कराई गई, वह भ्रामक एवं अपूर्ण थी।

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आयोग ने अपने आदेश में कहा कि यह सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधानों की अवहेलना तथा आयोग के आदेशों का घोर उल्लंघन है। इसके चलते आयोग ने रजनी नेगी, वरिष्ठ सहायक (शस्त्र), कलेक्ट्रेट देहरादून पर सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 20(1) के अंतर्गत ₹10,000 (दस हजार रुपये) का अर्थदंड अधिरोपित किया है।

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