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एक्सक्लुसिव वीडियों:श्री गुरुराम राय दरबार साहिब में झण्डा आरोहण श्री गुरुराम महाराज जी की सूक्ष्म उपस्थिति के रूप में बाज के दर्शन कर देश विदेश से आई संगते हुई निहाल

भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी 

उत्तराखंड देहरादून श्री झण्डे जी मेले का साक्षी बनने के लिए पूरे साल भर देश-दुनिया की संगतें बड़ी बेसब्री से इंतजार करती हैं।
आज पंचमी के दिन हज़ारों श्रद्धालुओं व संगतों की उपस्थिति में दरबार श्री गुरु राम राय जी परिसर में एतिहासिक श्री झण्डे जी (पवित्र ध्वज दण्ड) का आरोहण हुआ। श्री दरबार साहिब के सज्जादानशीन श्री महंत देवेन्द्र दास जी महाराज के दिशा निर्देशन में 2 बजकर 12 मिनट पर श्री झण्डे जी का आरोहण किया गया।


श्री गुरु रामराय महाराज जी के जयकारों से द्रोणनगरी गूंज उठी संगते धन्य धन्य हो गई।
सुबह 7ः00 बजे श्रद्धा व भक्तिभाव के साथ पुराने श्री झण्डे साहिब जी (ध्वज दण्ड) को उतारा गया। श्री झण्डे जी को उतारने के लिए संगतें श्री झण्डे जी के नीचे एकत्र हो गईं। श्री झण्डे जी को उतरते व फिर चढ़ते देखना अपने आप में अद्धभुत एवम अद्वितीय नज़ारा होता है। इस पुण्य लाभ को अर्जित करने के लिए देश-विदेश से आई संगतें इस पावन बेला का साल भर बड़ी ही बेसब्री से इंतजार करती हैं। श्री झण्डे साहिब जी की विशेष पूजा अर्चना की गई। श्री झण्डे साहिब जी (पवित्र ध्वज दण्ड) को संगतों ने सुबह दूध, घी, शहद, गंगाजल व पंचगब्यों से स्नान करवाया।

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इस बार 86 फीट ऊंचे (ध्वजदण्ड) श्री झण्डे साहिब जी पर पहले सादे और शनील के गिलाफ चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई। खास बात यह हैं कि इस दौरान श्री झण्डे साहिब जी को धरती पर नहीं रखा जाता। संगतें अपनी हाथों पर झण्डे जी को उठाये रहती हैं। जैसे-जैसे झण्डे साहिब जी पर गिलाफ के आवरण चढ़ाने का क्रम बढ़ता जाता है वैसे वैसे संगतों का उत्साह भी पराकाष्ठा तक पहुंचता जाता हैं । दोपहर करीब 12ः40 बजे तक श्री झण्डे साहिब जी पर सादे व शनील के गिलाफ चढ़ाने की प्रक्रिया चलती रही, इसके बाद दोपहर करीब एक बजे श्री झण्डे साहिब जी पर दर्शनी गिलाफ चढ़ाया गया। दर्शनी गिलाफ के चढ़ते ही व श्री झण्डे साहिब जी के आरोहण की प्रक्रिया प्रारम्भ हो गयी इसके साथ ही श्री गुरु राम राय महाराज जी के जयकारों की ध्वनि भी गुंजयमान हो गयी, तत्पश्चात नए मखमली वस्त्र और सुनहरे गोटों से सुसज्जित श्री झंडे साहिब जी के आरोहण की प्रक्रिया आरंभ होने का दृश्य देखकर श्रद्धालुओं के श्रद्धाभाव आंखों से छलक आए। हर कोई दर्शनी गिलाफ को छूकर पुण्य अर्जित करने के लिए उत्सुक दिख रहा था।
श्री गुरुराम राय जी दरबार साहिब जी के सज्जादानशीन श्री महंत देवेन्द्र दास जी महाराज जी के दिशा-निर्देशन में श्री झण्डे साहिब जी के नीचे लगी कैंचियों को थामे श्रद्धालुजन श्री झंडे साहिब जी को उठा रहे थे, श्री दरबार साहिब परिसर का समस्त परिसर श्री गुरु राम राय महाराज जी के जयकारों से गूंज उठा। दोपहर 2 बजकर 12 मिनट पर जैसे ही श्री दरबार साहिब देहरादून के सज्जादानशीन श्री महंत देवेन्द्र दास जी महाराज जी की अगुवाई में श्री झण्डे साहिब जी का आरोहण हुआ, वैसे ही पूरी द्रोणनगरी श्री गुरुराम राय जी महाराज जी के जयकारों से गूंज उठी।
साथ ही हमेशा की तरह इसी दौरान श्री गुरुराम राय जी महाराज जी की सूक्ष्म उपस्थिति के रूप में एक बाज ने श्री झण्डे साहिब जी की परिक्रमा की। श्री झण्डे साहिब जी के आरोहण के समय बाज की इस चमत्कारी उपस्थिति को श्री गुरु राम राय जी महाराज जी की सूक्ष्म उपस्थिति के रूप में हर साल दर्ज किया जाता है।


श्री झण्डे जी के आरोहण के बाद श्री दरबार साहिब के सज्जादानशीन श्री महंत देवेन्द्र दास जी महाराज जी ने सभी देश व प्रदेशवासियों सहित संगतों को श्री झण्डे साहिब जी मेले की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। श्री महाराज जी ने कहा कि श्री झण्डा मेला प्रेम, सदभावना, आपसी भाईचारा, सौहार्द, उल्लास व अमन-चैन का संदेश देने वाला मेला है ओर श्री झण्डे साहिब जी पर शीश नवाने से सभी भक्तों की मन्नतें पूरी होती हैं इसी कारण श्रद्धालुओं की श्री झण्डे साहिब जी के प्रति आस्था बढ़ती ही जा रही है। श्री महंत देवेन्द्र दास जी महाराज जी ने अपने संदेश में कहा कि देशवासियों-प्रदेशवासियों व विदेशों से श्री झण्डे साहिब जी मेले में शामिल होने आई संगतों पर श्री गुरु राम राय जी महाराज जी की कृपा सदैव बनी रहे।
कोविड-19 गाइडलाइन अनुपालन के चलते पिछले सालों की तुलना में इस बार संगतें काफी कम संख्या में मौजूद रहीं। दरबार श्री गुरु राम राय जी महाराज जी श्री झण्डा साहिब जी मेला आयोजन समिति विभिन्न माध्यमों से लगतार संगतों से सीमित संख्या में आने की अपील कर रही थी, उसी का यह प्रभाव रहा कि श्री झण्डा जी आरोहण मुख्य कार्यक्रम के दौरान सीमित संख्या में संगतें उपस्थित रहीं।