Human Rights

देहरादून:करंट से लगातार हो रही कर्मचारियों की मौतों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, UPCL के प्रबन्ध निदेशक को नोटिस

व्यापक जनहित में उठी आवाज पहुंची मानवाधिकार आयोग तक, पांच दिनों में चार आउटसोर्स कर्मियों की मौत और पांच वर्षों में 24 मौतों का मामला उठाया

करंट से लगातार हो रही कर्मचारियों की मौतों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, UPCL के प्रबन्ध निदेशक को नोटिस

व्यापक जनहित में उठी आवाज पहुंची मानवाधिकार आयोग तक, पांच दिनों में चार आउटसोर्स कर्मियों की मौत और पांच वर्षों में 24 मौतों का मामला उठाया

देहरादून:उत्तराखण्ड ऊर्जा निगम में विद्युत कार्यों के दौरान कथित सुरक्षा लापरवाही के कारण लगातार हो रही कर्मचारियों की मौतों के मामले में उत्तराखण्ड मानवाधिकार आयोग ने गंभीर रुख अपनाते हुए UPCL के प्रबन्ध निदेशक को नोटिस जारी किया है।

व्यापक जनहित में भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी द्वारा मानवाधिकार आयोग के समक्ष प्रस्तुत शिकायत में समाचार पत्र में प्रकाशित उन घटनाओं का संज्ञान लेने का अनुरोध किया गया था, जिनमें विद्युत कार्य के दौरान करंट लगने से कर्मचारियों की मौत का मामला सामने आया था। शिकायत में बताया गया था कि महज पांच दिनों के भीतर ऊर्जा निगम के चार आउटसोर्स कर्मचारियों की मृत्यु हुई, जबकि समाचार में पिछले पांच वर्षों के दौरान करंट लगने से 24 लोगों की मौत होने का भी उल्लेख किया गया था।

शिकायत में विद्युत लाइनों के शटडाउन की प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों को उपलब्ध कराए जा रहे सुरक्षा उपकरण एवं प्रशिक्षण तथा अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाते हुए इन घटनाओं की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने की मांग की गई थी।

मामले का संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने UPCL के प्रबन्ध निदेशक को नोटिस जारी किया है। आयोग के आदेश में शिकायत की प्रति प्रबन्ध निदेशक, उत्तराखण्ड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड, देहरादून को प्रेषित कर नियत तिथि तक आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रकरण की अगली सुनवाई/तिथि 19 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।

मानवाधिकार आयोग की इस कार्रवाई से विद्युत कर्मचारियों एवं आउटसोर्स कर्मियों की कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करने और विद्युत दुर्घटनाओं के लिए जवाबदेही तय करने की दिशा में उम्मीद जगी है।

व्यापक जनहित में उठाई गई आवाज पर मानवाधिकार आयोग की कार्रवाई को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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