स्टंटबाजों पर शिकंजा कसने की मांग पर मानवाधिकार आयोग सख्त
देहरादून की सड़कों पर खतरनाक स्टंट और रेसिंग का मामला: आयोग ने SSP को जारी किया नोटिस, मांगी आख्या
स्टंटबाजों पर शिकंजा कसने की मांग पर मानवाधिकार आयोग सख्त
देहरादून की सड़कों पर खतरनाक स्टंट और रेसिंग का मामला: मानवाधिकार आयोग ने SSP को जारी किया नोटिस, मांगी आख्या
“स्टंटबाजी सिर्फ यातायात नियमों का उल्लंघन नहीं, नागरिकों के जीवन के अधिकार पर भी खतरा” 
देहरादून:शहर की सड़कों पर लगातार हो रहे खतरनाक स्टंट, तेज रफ्तार, रेसिंग एवं यातायात नियमों के खुलेआम उल्लंघन के मामले में उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता दिखाई है। समाचार पत्र में प्रकाशित खबर “यातायात नियम तोड़ने से बाज नहीं आ रहे स्टंटबाज,बिना हेलमेट वालों के खूब हो रहे चालान पर स्टंटबाजों पर शिकंजा नहीं कस पा रही है पुलिस” को आधार बनाकर सामाजिक, आरटीआई एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी द्वारा आयोग के समक्ष जनहित में शिकायत प्रस्तुत की गई थी।
शिकायत में कहा गया था कि देहरादून की सार्वजनिक सड़कों पर कुछ लोग मोटरसाइकिल एवं अन्य वाहनों से खतरनाक स्टंट, तेज रफ्तार और रेसिंग कर रहे हैं। इससे आम नागरिकों, महिलाओं, बच्चों, विद्यार्थियों, वरिष्ठ नागरिकों तथा अन्य वाहन चालकों की जान-माल को गंभीर खतरा बना हुआ है।
अनुच्छेद 21 के अधिकार का भी उठाया मुद्दा
शिकायतकर्ता ने मामले को केवल यातायात नियमों के उल्लंघन तक सीमित न रखते हुए इसे नागरिकों के मौलिक अधिकार एवं मानवाधिकार से जुड़ा गंभीर विषय बताया। शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि—
“यह स्थिति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत नागरिकों को प्राप्त जीवन एवं सुरक्षित वातावरण में आवागमन के अधिकार को प्रभावित करती है।”
शिकायत में आगे कहा गया कि यदि लगातार शिकायतों एवं समाचारों के बावजूद ऐसे तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित नहीं हो पा रहा है, तो इसके कारणों की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। सार्वजनिक सड़कों पर खतरनाक स्टंट और रेसिंग के कारण किसी भी समय बड़ी दुर्घटना एवं जनहानि की आशंका बनी रहती है।
मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
शिकायत पर कार्रवाई करते हुए कार्यवाहक अध्यक्ष गिरधर सिंह धर्मशक्तू उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून को नोटिस जारी किया गया है।
आयोग की कार्रवाई में समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के आधार पर प्रस्तुत शिकायत का उल्लेख करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून से अपना पक्ष/आख्या प्रस्तुत करने को कहा गया है। आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार नोटिस की कार्रवाई 04 अगस्त 2026 को की गई तथा प्रकरण की पत्रावली निर्धारित तिथि 05 नवंबर 2026 को प्रस्तुत की जानी है।
स्टंटबाजों के खिलाफ विशेष अभियान की मांग
शिकायतकर्ता ने आयोग से मांग की थी कि देहरादून के संवेदनशील मार्गों पर सीसीटीवी, ड्रोन एवं स्पीड कैमरों के माध्यम से नियमित निगरानी कराई जाए। खतरनाक स्टंट एवं रेसिंग करने वालों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए तथा बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस के निलंबन/निरस्तीकरण और वाहनों को जब्त करने जैसी वैधानिक कार्रवाई की जाए।
साथ ही शिकायत में यह भी मांग उठाई गई थी कि यदि किसी क्षेत्र में पुलिस की लापरवाही, प्रभावी गश्त की कमी अथवा कार्रवाई में शिथिलता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी निर्धारित की जाए।
आयोग की कार्रवाई से जगी उम्मीद
शिकायतकर्ता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी का कहना है कि यातायात नियमों का पालन केवल चालान तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि सड़क पर प्रत्येक नागरिक के जीवन, सुरक्षा और सुरक्षित आवागमन के अधिकार से जुड़ा मामला है।
मानवाधिकार आयोग द्वारा मामले में संज्ञान लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से जवाब तलब किए जाने से उम्मीद जगी है कि देहरादून की सड़कों पर आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस स्तर पर प्रभावी एवं ठोस कार्रवाई होगी।
सत्यमेव जयते।




