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मानवाधिकार आयोग और डीएम देहरादून के जनता दरबार में उठी देहरादून मच्छी बाजार में मुर्गों के साथ क्रूरता की शिकायत, जांच एवं कार्रवाई के आदेश

“मौत तय होने का मतलब यह नहीं कि बेजुबान जीवों को अमानवीय यातनाएँ दी जाएँ।”

मानवाधिकार आयोग और डीएम देहरादून के जनता दरबार में उठी देहरादून मच्छी बाजार में मुर्गों के साथ क्रूरता की शिकायत,जांच एवं कार्रवाई के आदेश

“मौत तय होने का मतलब यह नहीं कि बेजुबान जीवों को अमानवीय यातनाएँ दी जाएँ।”

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देहरादून के मच्छी बाजार क्षेत्र में मुर्गों के साथ कथित अमानवीय व्यवहार और क्रूरता के मामले ने अब प्रशासनिक एवं मानवाधिकार स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी द्वारा जिलाधिकारी देहरादून के जनता दरबार तथा उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग में की गई शिकायत पर कार्रवाई शुरू हो गई है।

शिकायत के अनुसार 08 अप्रैल 2026 की सुबह देहरादून के मच्छी बाजार क्षेत्र में अन्य राज्यों से लाई गई मुर्गों से भरी गाड़ियों में जीवित मुर्गों को 30-40 की संख्या में एक साथ बांधकर उल्टा लटकाया जा रहा था तथा उसी अवस्था में उनका वजन किया जा रहा था। शिकायतकर्ता ने इसे न केवल अमानवीय कृत्य बताया बल्कि इसे पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 एवं पशु कल्याण नियमों का खुला उल्लंघन भी बताया।

मामले में उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरधर सिंह धर्मशक्तू ने 06 मई 2026 को संज्ञान लेते हुए अध्यक्ष/सचिव जिला पशु क्रूरता निवारण समिति, देहरादून को नोटिस जारी किया है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों से नियत तिथि तक विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को की जाएगी।

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वहीं जिलाधिकारी देहरादून के जनता दरबार में दर्ज शिकायत पर भी प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो गई है। वरिष्ठ पशुचिकित्सा अधिकारी नगर निगम देहरादून डॉ. वरूण अग्रवाल द्वारा संयुक्त सचिव, पशु कल्याण बोर्ड (Animal Welfare Board of India) को पत्र भेजकर मामले में जांच एवं कठोर कार्रवाई का अनुरोध किया गया है।

नगर निगम द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मुर्गों को बड़ी संख्या में एक साथ बांधकर उल्टा लटकाने से उन्हें अत्यधिक पीड़ा, चोट एवं अनावश्यक कष्ट होता है, जो कि पशु कल्याण के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि उक्त कृत्य Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 तथा पशुओं के परिवहन एवं संरक्षण से संबंधित नियमों का उल्लंघन प्रतीत होता है।

प्रशासन से यह भी अनुरोध किया गया है कि दोषी व्यवसायियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में पशु एवं पक्षियों के परिवहन, रख-रखाव एवं विक्रय के दौरान पशु कल्याण मानकों का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित कराया जाए।

यह मामला अब देहरादून में पशु अधिकारों एवं पशु कल्याण नियमों के पालन को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

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