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नशा मुक्त भारत अभियान कार्यक्रम में बच्चों की सेहत से खिलवाड़, बांटे गए एक्सपायरी डेट के चिप्स,जिला समाज कल्याण अधिकारी को आयोग का नोटिस

बांटे गए एक्सपायरी डेट के चिप्स,जिला समाज कल्याण अधिकारी को आयोग का नोटिस

नशा मुक्त भारत अभियान कार्यक्रम में बच्चों की सेहत से खिलवाड़, बांटे गए एक्सपायरी डेट के चिप्स,जिला समाज कल्याण अधिकारी को आयोग का नोटिस

हरिद्वार में समाज कल्याण विभाग की ओर से ऋषिकुल परिसर में आयोजित नशा मुक्त भारत अभियान कार्यक्रम में बरती गई घोर लापरवाही, यहां कार्यक्रम में मौजूद स्कूली बच्चों को बांटे गए एक्सपायर चिप्स के पैकेट 

उपरोक्त मामले में मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड में जनहित याचिका दायर कर निवेदन किया गया कि “हरिद्वार में समाज कल्याण विभाग की ओर से ऋषिकुल परिसर में आयोजित नशा मुक्त भारत अभियान कार्यक्रम में घोर लापरवाही बरतते हुए नशा मुक्ति कार्यक्रम में बच्चों को एक्सपायरी चिप्स के पैकेट बांटे गए”।

“कार्यक्रम में मौजूद स्कूली बच्चों को एक्सपायरी चिप्स के पैकेट देने से हंगामा हो गया। अभियान के पांच साल पूरे होने के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें विभिन्न स्कूलों के बच्चों को बुलाया गया था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जब बच्चों को नाश्ता वितरित किया गया, तो उसमें मौजूद चिप्स के पैकेट एक्सपायरी डेट के निकले। यह कुछ पैकेटों की नहीं, बल्कि कार्यक्रम में मौजूद लगभग सभी बच्चों को एक्सपायरी चिप्स पैकेट दिए गए। इससे खूब हंगामा हुआ। कार्यक्रम में करीब 500 बच्चे मौजूद थे”। 

“शिक़ायत का विषय बहुत ही गंभीर और स्पष्ट रूप से आमजन की जानमाल की हानि से जुड़ा हुआ है इसलिए जनहित, न्यायहित में रिपोर्ट तलब कर तत्काल कार्रवाई करने की कृपा करें”।

मानवाधिकार आयोग के सदस्य (आईपीएस) राम सिंह मीना द्वारा शिकायत पर सुनवाई करते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी, हरिद्वार को नोटिस जारी कर आख्या मांगी गई है।

*”आदेश#*

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शिकायतकर्ता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी द्वारा हरिद्वार में समाज कल्याण विभाग द्वारा ऋषिकुल परिसर में आयोजित नशा मुक्त भारत अभियान कार्यक्रम में घेर लापरवाही बरतने, कार्यक्रम में बच्चों को एक्पाईरी डेट के चिप्स के पैकट बांटे जाने के सम्बन्ध में शिकायत प्रस्तुत की है।

शिकायत की प्रति जिला समाज कल्याण अधिकारी, हरिद्वार को भेज दी जाये कि वे इस सम्बन्ध में अपनी आख्या आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें।

यह घटना बच्चों के स्वास्थ्य और सरकारी आयोजनों में पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाती है। मामले की जांच से जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उम्मीद है।

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