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एक्सक्लूसिव: …तो सहसपुर थाने में आत्महत्या करने वाले युवक की अवैध थी हिरासत!

उत्तराखण्ड राज्य के जिला देहरादून के सहसपुर थाने की हवालात में जिस आरोपी युवक अभिनव कुमार यादव ने फांसी लगाई थी, उसे सहसपुर थाने की पुलिस ने अवैध हिरासत में रखा हुआ था। यह हम नहीं, सहसपुर पुलिस द्वारा अज्ञात पुलिसकर्मियों पर अवैध हिरासत में मुकदमा दर्ज किया जाना इस बात की पुष्टि करता है।
इस संबंध में शुक्रवार को उक्त युवक को अवैध हिरासत में रखने के मामले को लेकर केदारनाथ आपदा घोटाले का खुलासा करने वाले मानवाधिकार व आरटीआई कार्यकर्ता भूपेंद्र कुमार ने राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री, मुख्य न्यायमूर्ति सर्वोच्च न्यायालय, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भारत, राज्यपाल उत्तराखण्ड, मुख्य न्यायमूर्ति उच्च न्यायालय उत्तराखण्ड, मानवाधिकार आयोग उत्तराखण्ड एवं पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) उत्तराखण्ड देहरादून को पत्र लिखकर कार्यवाही की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि जनहित एवं न्यायहित में दोषी पुलिस अधिकारियों तथा कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्यवाही करने की जाए। साथ ही उच्चस्तरीय अथवा सीबीआई से जांच करवाने के आदेश दिए जाएं। उन्होंने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में रखना पुलिस की मंशा को साफ दर्शाता है। इसलिए यह मामला और गंभीर हो जाता है एवं खुलेआम मानवाधिकारों के उल्लंघन है।
इसके अतिरिक्त भूपेंद्र कुमार ने उक्त प्रकरण में आरटीआई के माध्यम से सभी दस्तावेजों की मांग की है, जिससे अवैध हिरासत में रखने का सच सामने आ सके।

उल्लेखनीय है कि पोक्सो एक्ट के अंतर्गत अभिनव कुमार यादव सहसपुर थाने की हवालात में बंद था। पुलिस के अनुसार जिसने कंबल के किनारे को फाड़कर फंदे से दीवार पर लटककर फांसी लगा दी थी। जब यह मामला मीडिया में उछला और एसपी सिटी की प्रारंभिक जांच के उपरांत अज्ञात पुलिस कर्मियों के खिलाफ अवैध हिरासत में रखने का मुकदमा दर्ज कर दिया गया। जाहिर है कि पुलिस ने यह स्वीकार किया है कि उक्त युवक को सहसपुर पुलिस द्वारा अवैध हिरासत में रखा गया।

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