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बाल आयोग में SSP दून ने दिया जवाब ऋषिकेश में मास्क न पहने बच्चे को दरिन्दगी से पीटने वालें पुलिसकर्मियों के निलंबन पश्चात SP मुख्यालय Crime द्वारा विभागीय कार्यवाही संबंधित जाँच की जा रही हैं

भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी 

उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने ऋषिकेश में मास्क न पहने बच्चे को दरिन्दगी से पीटने वालें पुलिसकर्मियों पर की जा रही कार्यवाही के सम्बंध अपना जवाब दाखिल किया है कि दोषी पुलिसकर्मियों के निलंबन पश्चात पुलिस अधीक्षक मुख्यालय/अपराध द्वारा विभागीय कार्यवाही सम्पादित की जा रही हैं।


सम्पूर्ण वाक्या इस प्रकार है कि देहरादून के ऋषिकेश में पुलिसकर्मियों ने मास्क न पहनें होने के कारण एक बच्चे की बेहरहमी से पिटाई कर मार-मार कर उसे जमीन पर लिटा दिया और तब एक व्यक्ति द्वारा पुलिसकर्मियों को कहा गया कि बच्चे की तबियत ख़राब हो रखी हैं । इसने गलती से मास्क उतार दिया और आप उसको मारकर ठीक नही कर रहे है और आप लोग ये गलत काम कर रहे हो बच्चे से गलती से ऐसा हो गया इसलिए हाथ जोड़कर माफ़ी मांग रहा हूं।पुलिस वाला ये सुनते ही बहुत ही ज्यादा बिफर गया शायद वर्दी का घमण्ड और दंबगई इसके बाद पुलिस वाले ने बचाने की कोशिश करने वाले से भी पिटाई ओर गालीगलौज शुरू कर दी।

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परंतु सवाल यह है कि क्या मास्क ना पहनने पर पुलिस कर्मियों द्वारा पिटाई का रास्ता अपनाना चाहिए था अगर मास्क नहीं पहना था तो उसका चालान करते और पुलिस कर्मियों ने पिटाई भी की तो एक बीमार बच्चे की और उस बीमार बच्चे को बचाने की जिस व्यक्ति ने पैरवी की उसकी भी पुलिसकर्मियों ने गाली गलौज करने के साथ पिटाई कर दी इन पुलिसवालों ने तों एक बीमार बच्चे और उसको बचाने वाले की पिटाई गालीगलौज कर अमानवता की मिसाल पैदा कर दी ।
इस संवाददाता द्वारा इस अत्यंत गंभीर मामले की शिकायत उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग देहरादून में की गयी थी कि इन पुलिसकर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्यवाही की जाए उसी प्रकार कि जिस प्रकार आम आदमी द्वारा किसी से मारपीट गाली-गलौज करने पर कानूनी कार्यवाही की जाती है वही कार्यवाही इन दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी होनी चाहिए और साथ ही क्योंकि सस्पेंड होने के बाद यह कर्मी अपने आकाओं की शरण में दौड़ेंगे और कुछ दिन बाद फिर बहाल हो जाएंगे।
बाल अधिकार संरक्षण आयोग में शिकायत पश्चात आयोग की अध्यक्षा उषा नेगी द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। आयोग के दो बार नोटिस भेजने के पश्चात वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून द्वारा जवाब दिया गया कि दोषी पुलिसकर्मियों के निलंबन पश्चात पुलिस अधीक्षक मुख्यालय/अपराध द्वारा विभागीय कार्यवाही सम्पादित की जा रही हैं।
बाल अधिकार आयोग द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून का जवाब जांच रिपोर्ट मिलने के पश्चात इसकी प्रति मुझे शिकायतकर्ता को भी भेजी गई है तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा भेजी गई जांच रिपोर्ट में अपने मंतव्य/पक्ष से आयोग को 15 फ़रवरी 2021 से पूर्व अवगत कराने को निर्देशित किया गया है।
इस अत्यंत ही गंभीर प्रकरण के संबंध में इस संवाददाता द्वारा अपना जवाब बाल अधिकार आयोग में भेजा जा रहा है कि इस प्रकरण को लगभग 3 माह होने वाले हैं और अभी तक जांच संपादित ही की जा रही हैं। विभाग द्वारा कहीं दोषी पुलिसकर्मियों को बचाने की कोशिश तो नहीं की जा रही है तथा एक बच्चे पर अपनी दरिंदगी दिखाने वाले इन पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी विभागीय तथा कानूनी कार्यवाही जरूर होनी चाहिए जिस प्रकार कि एक आम इंसान के ऊपर इस प्रकार का अपराध करने पर कार्यवाही की जाती है।