एक्सक्लूसिव

पुलिस के फर्जी मुकदमे पर आयोग गंभीर तलब की रिपोर्ट।

भूपेंद्र कुमार लक्ष्मी

उत्तराखंड देहरादून कि थाना क्लेमेंट टाउन पुलिस थाने के पुलिसकर्मियों द्वारा एक व्यक्ति को झूठे चरस तस्करी के मुकदमे में फंसाना पुलिस को पड़ा भारी कोर्ट द्वारा कार्यवाही के आदेशों के बाद मानवाधिकार आयोग ने भी की कार्यवाही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को जाँच के आदेश और पूरे मामलें की मांगी गयी रिपोर्ट ।
उत्तराखंड देहरादून की थाना क्लेमेंटटाउन पुलिस थाने के पुलिसकर्मियों द्वारा 15 फरवरी 2009 को अनवर नाम के एक युवक को चरस तस्करी के झूठे केस में फंसाकर उसके विरुद्ध कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी निर्दोष व्यक्ति अनवर को फंसाने वाले दोनों पुलिसकर्मी हसन और अरशद सगे भाई हैं परन्तु कोर्ट ने 11 वर्ष बाद पीड़ित अनवर को बरी कर दिया इसके साथ ही कोर्ट ने दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ दंडात्मक और अनुशासनिक कार्रवाई हेतु अधिकारियों को आदेशित भी किया गया है ।

पुलिस के उत्पीड़न के इस अत्यन्त ही गंभीर मामलें की इस संवाददाता ने जनहित में मानवाधिकार आयोग में याचिका दायर कर मांग की गयी कि यह खुलेआम मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला है क्योंकि पुलिसकर्मियों द्वारा 11 वर्ष तक एक निर्दोष व्यक्ति का बहुत ही बुरी तरीके से उत्पीड़न किया गया है उसके एवं उसके परिवार पर क्या गुजरी होगी इसलिए दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई कर समस्त मामले की रिपोर्ट तलब करने की कृपा करें क्योंकि पुलिस के अधिकारी दोषी पुलिसकर्मियों को बचाने की कोशिश कर सकते हैं क्योंकि कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध दंडात्मक और अनुशासन कार्रवाई हेतु आदेशित किया है।
मानवाधिकार आयोग के सदस्य अखिलेशचंद्र शर्मा और आर एस मीणा ने याचिका पर सुनवाई करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को समस्त प्रकरण की जांच हेतु आदेशित कर पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है।

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