देहरादून में अनियंत्रित खूंखार कुत्तों का खतरा: मानवाधिकार आयोग ने नगर आयुक्त नगर निगम से मांगी रिपोर्ट
देहरादून में अनियंत्रित खूंखार कुत्तों का खतरा: 50 हजार से ज्यादा पालतू कुत्तों में सिर्फ 10 हजार रजिस्टर्ड, मानवाधिकार आयोग ने नगर आयुक्त नगर निगम देहरादून से मांगी रिपोर्ट
जिला देहरादून में कई नस्लों के लगभग 50 हजार से अधिक कुत्ते पाले जा रहे हैं ,जिनमें कई विदेशी नस्लों के खूंखार कुत्ते भी हैं,इन नस्लों के कुत्ते आबादी वाले इलाकों में नहीं रखे जा सकते परंतु नगर निगम के पास 50 हज़ार में से लगभग 10 हजार का ही पंजीकरण है,यह खूंखार कुत्ते कई लोगों को हानि पहुंचा चुके हैं इन खूंखार कुत्तों से स्पष्ट रूप से आमजनता की जानमाल की हानि का खतरा।
उपरोक्त मामले में इस संवाददाता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी द्वारा दिनाँक-25-7-2025 मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड में जनहित याचिका दायर कर निवेदन किया गया कि “जिला देहरादून में कई नस्लों के लगभग 50 हजार से अधिक कुत्ते पाले जा रहे हैं परंतु नगर निगम के पास सिर्फ 10 हजार का ही पंजीकरण है। कुत्तों की सटीक ट्रेसिंग के लिए नगर निगम के पास कोई भी रणनीति नहीं है।
पशु चिकितालय तो शहर भर के खूंखार कुत्तों की जानकारी रखते हैं लेकिन नगर निगम को इनकी जानकारी नहीं है”।
दून के 24 पशु चिकित्सालयों में बड़ी संख्या में विदेशी नस्ल के कुत्ते उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें आठ से 10 बड़े आकार वाली विदेशी नस्लें भी शामिल हैं। वैसे तो इन नस्लों के कुत्ते आबादी वाले इलाकों में नहीं रखे जा सकते इसके बाद भी शहर में खुलेआम रॉटविलर, ग्रेटडेन, विभिन्न तरह के मास्टिफ, पिटबुल, केनकोंसों, अचिता और अलेस्कन मालाम्यूट समेत करीब आठ से 10 विदेशी नस्लों के खूंखार कुत्ते पाले जा रहे हैं। इनमें से अधिकतर कुत्तों की नगर निगम को खबर तक नहीं है।
देहरादून में खूंखार पालतू कुते तो दहशत का पर्याय बने हुए ही हैं, परंतु गलियों में लावारिस कुत्तों पर भी नगर निगम का कोई नियंत्रण नहीं है। नगर निगम इनकी नसबंदी के दावे करता है, लेकिन इनकी संख्या में कमी नहीं आ रही है। आबादी वाले क्षेत्रों में गलियों में बड़ी संख्या में कुते हैं जो राहगीरों पर झपटते हैं।
देहरादून के रिहायशी इलाकों में पाले जा रहे बड़े आकार वाले विदेशी नस्ल के खूंखार कुते लोगों के लिए जान का खतरा पैदा कर सकते हैं। गत दिनों किशननगर में एक बुजुर्ग पर रॉटविलर कुत्ते के हमले की घटना भी हो चुकी है। बिना पंजीकरण और टीकाकरण वो अवैध रूप से पाले जा रहे कुत्तों ने मंदिर जा रही बुजुर्ग की हालत इतनी गंभीर कर दी थी कि उनके इलाज में अब तक लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं। निगम आरोपी कुत्ता मालिक पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ एक हजार रुपये जुर्माना लगा पाया था।
अत: माननीय महोदय जी से निवेदन है कि शिक़ायत का विषय बहुत ही गंभीर और स्पष्ट रूप से आमजनता की जानमाल की हानि से जुड़ा हुआ है इसलिए जनहित,न्यायहित में तत्काल मुख्य नगर आयुक्त, नगर निगम देहरादून के साथ ही सचिव शहरी विकास विभाग उत्तराखंड को कार्यवाही हेतु निर्देशित कर रिपोर्ट तलब कर कड़ी कार्रवाई करने की कृपा करें, क्योंकि यह स्थिति देहरादून के साथ राज्य के अन्य जिलों में भी हो सकती है, हरिद्वार में भी माह मार्च 2025 में खूंखार कुत्तों ने एक मासूम बच्ची पर हमला कर दिया था।
आयोग के सदस्य गिरधर सिंह धर्मशक्तू द्वारा दिनांक 30/7/2025 को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नगर आयुक्त, नगर निगम, देहरादून को निर्देशित करते हुए आदेश जारी किए गए।
*आदेश*

शिकायतकर्ता द्वारा शिकायती पत्र प्रस्तुत करते हुए अवगत कराया गया है कि देहरादून में कई नस्लों के लगभग 50 हजार से अधिक कुत्ते पाले जा रहे है जिनमें कई विदेशी नस्लों के खूंखार कुत्ते भी हैं, इन नस्लों के कुत्ते आबादी वाले इलाके में नही रखे जा सकते है। नगर निगम के पास सिर्फ 10 हजार का ही पंजीकरण है। यह खूंखार कुत्ते कई लोगों को हानि पहुंचा चुके हैं इन खूंखार कुत्तों से आमजनता को जानमाल का खतरा बना हुआ है।
शिकायती प्रार्थना पत्र की प्रति नगर आयुक्त, नगर निगम, देहरादून को प्रेषित की जाए, वह नियत तिथि तक अपनी आख्या प्रस्तुत करेंगे।
पत्रावली दिनांकः 02.09.2025 को पेश हो।
यह मामला पालतू और लावारिस कुत्तों के प्रबंधन में प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, जिससे शहरवासियों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पंजीकरण, टीकाकरण और सख्त नियमों का पालन सुनिश्चित करने से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।




