उत्तराखंड में महिलाओं के लावारिस शवों का गंभीर मामला, मानवाधिकार आयोग सख्त — DGP से मांगी रिपोर्ट
उत्तराखंड में महिलाओं के लावारिस शवों का गंभीर मामला, मानवाधिकार आयोग सख्त — DGP से मांगी रिपोर्ट
देहरादून:उत्तराखंड राज्य में महिलाओं के लावारिस शवों के लगातार मिलने और बिना पहचान के दफनाए जाने के मामले ने गंभीर रूप ले लिया है।
यह गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का मामला है, जो न्याय व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। इन शवों की मौत का कारण, हत्या, हिंसा या तस्करी जैसे अपराधों का खुलासा नहीं हो पाता, जिससे अपराधियों को बचने का मौका मिलता है और पीड़ित परिवार न्याय से वंचित रहते हैं।
मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े इस मुद्दे पर शिकायतकर्ता मानवाधिकार,आरटीआई सामाजिक कार्यकर्ता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी, निवासी नेहरू कॉलोनी देहरादून ने दिनांक 22 अगस्त 2025 को उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग में जनहित याचिका दाखिल की।
याचिका में बताया गया कि पिछले पांच सालों में उत्तराखंड में 231 महिलाओं के लावारिस शव मिले, जिनमें से 72 फीसदी शव बिना शिनाख्त के दफन कर दिए गए। वर्ष 2021 से जून 2025 तक कुल 318 महिलाओं के लावारिस शव बरामद हुए।
यह भी कहा गया कि शिनाख्त न होने के कारण इन मौतों के पीछे हत्या, हिंसा, शोषण या तस्करी जैसी संभावनाओं का खुलासा नहीं हो पाता। नतीजतन, कई अपराधी बच निकलते हैं और पीड़ित परिवारों को न्याय से वंचित रहना पड़ता है।

मानवाधिकार आयोग ने इस गंभीर मामले में सुनवाई करते हुए 27 अगस्त 2025 को आयोग के सदस्य राम सिंह मीना द्वारा पुलिस महानिदेशक (DGP) उत्तराखंड को नोटिस जारी किया है। आयोग ने निर्देश दिया है कि पुलिस महानिदेशक इस संबंध में अपनी विस्तृत रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा में आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें।
यह मामला सिर्फ पहचान का नहीं, बल्कि इंसाफ का भी है। सवाल यह है कि ये महिलाएं कौन थीं, कहां से आईं और उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई? जब तक इनकी शिनाख्त नहीं होती, तब तक इन सवालों के जवाब मिलना संभव नहीं।




