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बिगब्रेकिंग:विधायक द्वारा जबरन हाईवे खोलने पर हुए हादसे में युवक की मौत मामले में दायर याचिका पर SSP को नोटिस जारी मांगा जवाब

भूपेन्द्र लक्ष्मी

विधायक द्वारा जबरन हाईवे खोलने पर हादसे में युवक की मौत मामले में दायर याचिका पर SSP को नोटिस जारी मांगा जवाब
उत्तराखंड के गदरपुर में एनएच -74 पर बना बाईपास जो सुरक्षा की दृष्टि से चालू हालत में नहीं है, उसको विधायक अरविंद पांडे एवम् उनके समर्थकों द्वारा जबरन खुलवाने पर बाईपास पर ट्रैफिक शुरू होते ही बड़ा हादसा हो गया था जिस कारण ट्रक की चपेट में आने से एक युवक की मृत्यु हो गई।

मामला इस प्रकार हैं कि गदरपुर में एनएच -74 पर बने बाईपास को एनएचएआई के अधिकारियो और कार्यदाई संस्था के मना करने के बाद भी विधायक अरविंद पांडे और उनके समर्थकों द्वारा बाईपास जबरन खुलवाने के कारण बड़ा हादसा हो गया था तथा आवाजाही शुरू कराने के करीब डेढ़ घंटे बाद ही ट्रक की चपेट में आकर बाइक सवार की जान चली गई थीं।

इस हादसे से पूर्व सीओ बाजपुर भूपेंद्र सिंह भंडारी, थानाध्यक्ष गदरपुर राजेश पांडे पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने विधायक से सुरक्षा कारणों के चलते बाईपास को नहीं खोले जाने का अनुरोध भी किया था लेकिन वहां इकट्ठा कार्यकर्ताओं ने ट्रैक्टर से अवरोधक हटा दिए जिस कारण बाईपास खुलने के थोड़ी देर बाद ही भूसे से भरे एक ट्रक ने बाईक सवार गदरपुर निवासी सुरेंद्र (उम्र 28 वर्ष) पुत्र उम्मेद सिंह को अपनी चपेट में ले लिया तथा अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई।

एसपी काशीपुर अभय सिंह का भी कहना है कि बाईपास सुरक्षा की दृष्टि से चालू हालत में नहीं है।

इस संवाददाता ने इस मामले में मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड में जनहित याचिका दायर कर निवेदन किया कि शिकायत का विषय अत्यंत ही गम्भीर हैं,जोकि स्पष्ट रूप से एक युवक की मृत्यु से जुड़ा हुआ है, परन्तु मामला विधायक से स्पष्ट रूप से जुड़ा होने के कारण लीपापोती भी की जा सकती हैं, इसलिए संपूर्ण मामले की रिपोर्ट तलब कर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करने की कृपा करें।
उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति अखिलेश चन्द्र शर्मा द्वारा शिकायत की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून उधमसिंह नगर को नोटिस जारी कर संपूर्ण मामले की रिपोर्ट 4 सप्ताह के अंदर तलब की गई है।

साथ ही आयोग के अनुसचिव द्वारा जारी नोटिस में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उधमसिंह नगर को कहा गया हैं कि आयोग के उपरोक्त आदेश की अपेक्षानुरूप कार्यवाही ना किए जाने की स्थिति में आयोग द्वारा विचारोंप्रांत यथोचित आदेश पारित कर दिए जाएंगे

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