Human Rights

ढाई साल की लड़ाई रंग लाई,मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद राजीव गांधी कॉम्प्लेक्स में शुरू हुई नई लिफ्टें

दिव्यांगों, बुजुर्गों और आमजन को मिली बड़ी राहत,एमडीडीए की कार्यवाही सराहनीय

ढाई साल की लड़ाई रंग लाई: मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद राजीव गांधी कॉम्प्लेक्स में शुरू हुई नई लिफ्टें

दिव्यांगों, बुजुर्गों और आमजन को मिली बड़ी राहत, एमडीडीए की कार्यवाही सराहनीय

देहरादून:डिस्पेंसरी रोड स्थित राजीव गांधी बहुउद्देशीय कॉम्प्लेक्स में वर्षों से बंद पड़ी लिफ्टों और आमजन, विशेषकर दिव्यांगों एवं बुजुर्गों को हो रही भारी परेशानियों के मामले में आखिरकार बड़ी राहत मिल गई है। मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड में दर्ज जनहित शिकायत और लगातार हुई सुनवाई के बाद मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने पुरानी लिफ्टों को हटाकर नई लिफ्टें स्थापित कर दी हैं, जिनका संचालन अब सुचारू रूप से किया जा रहा है।

यह मामला वर्ष 2023 में तब सामने आया था जब दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर और तस्वीरों ने सरकारी व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर की थी। तस्वीरों में एक दिव्यांग व्यक्ति को व्हीलचेयर सहित सीढ़ियों से ऊपर ले जाते हुए देखा गया था, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए थे।

इसके बाद दिनांक 29 जुलाई 2023 को मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड में सामाजिक कार्यकर्ता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी द्वारा जनहित में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में कहा गया था कि कॉम्प्लेक्स में लगी एक लिफ्ट केवल अधिकारियों के उपयोग में आ रही थी, जबकि दूसरी लिफ्ट लंबे समय से खराब पड़ी थी। जो लिफ्ट चल रही थी वह बेसमेंट से सीधे चौथी मंजिल पर खुलती थी, जिससे पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल पर जाने वाले लोगों विशेषकर दिव्यांगों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया था कि इसी भवन में तहसील, जिला पूर्ति कार्यालय, आवास विकास एवं नगर विकास प्राधिकरण सहित कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय संचालित होते हैं, जहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग पहुंचते हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया और संबंधित विभागों से जवाब तलब किया। आयोग द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद उपजिलाधिकारी सदर देहरादून एवं मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण की ओर से आयोग में आख्या प्रस्तुत की गई।

हालांकि शिकायतकर्ता द्वारा आयोग को बताया गया कि लंबे समय तक केवल पत्राचार होता रहा और धरातल पर कोई सुधार दिखाई नहीं दिया। यहां तक कि जिलाधिकारी के निर्देशों के बाद भी लिफ्टों का संचालन शुरू नहीं हो पाया था।

लेकिन अंततः आयोग की सख्ती और लगातार जनहित प्रयासों के बाद एमडीडीए ने नई लिफ्टें स्थापित कर उनका संचालन शुरू करा दिया। प्राधिकरण की ओर से आयोग में प्रस्तुत आख्या में बताया गया कि पुरानी लिफ्टों को हटाकर नई लिफ्टें लगाई जा चुकी हैं तथा भविष्य में किसी प्रकार की खराबी आने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए गए हैं। इसके साथ ही वार्षिक रखरखाव अनुबंध (AMC) की प्रति और नई लिफ्टों के फोटोग्राफ भी आयोग को उपलब्ध कराए गए।

दिनांक 19 मई 2026 को हुई सुनवाई में शिकायतकर्ता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी ने एमडीडीए द्वारा की गई कार्यवाही पर संतोष जताते हुए कहा कि व्यापक जनहित में लिफ्टों का संचालन शुरू कराया जाना सराहनीय कदम है। उन्होंने मानवाधिकार आयोग और मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण दोनों का आभार व्यक्त करते हुए वाद के निस्तारण का अनुरोध किया।

यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया है कि यदि जनहित के मुद्दों को लगातार और संवैधानिक तरीके से उठाया जाए तो व्यवस्थाओं में सुधार संभव है। 

साथ ही यह भी साबित हुआ कि मानवाधिकार आयोग के प्रभावी हस्तक्षेप और प्रशासनिक इच्छाशक्ति से आमजन को वास्तविक राहत दिलाई जा सकती है।

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