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उत्तराखंड पुलिस में 2001 से 2025 तक अधिकारियों की संख्या में वृद्धि पर उठे सवाल, जनहित में आरटीआई के जरिए मांगी गई विस्तृत जानकारी

उत्तराखंड पुलिस में 2001 से 2025 तक अधिकारियों की संख्या में वृद्धि पर उठे सवाल,जनहित में आरटीआई के जरिए मांगी गई विस्तृत जानकारी

देहरादून:उत्तराखंड राज्य गठन के बाद पुलिस विभाग में उच्च व मध्यम स्तर के अधिकारियों की संख्या में हुई वृद्धि को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एवं जागरूक नागरिक भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी द्वारा जनहित में पुलिस मुख्यालय उत्तराखंड से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत विस्तृत जानकारी मांगी गई है।

दिनांक 02-12-2025 को लोक सूचना अधिकारी, पुलिस मुख्यालय उत्तराखंड, देहरादून को आवेदन भेजा गया है। आवेदन में वर्ष 2001 (राज्य गठन के प्रारंभिक काल) से लेकर दिसंबर 2025 तक पुलिस विभाग में तैनात अधिकारियों की संख्या और उसमें हुई प्रतिशत वृद्धि का विवरण विभागीय प्रमाण सहित मांगा गया है।

 

आरटीआई आवेदन में विशेष रूप से आईपीएस, पीपीएस, सर्किल ऑफिसर (सीओ), इंस्पेक्टर तथा सब-इंस्पेक्टर संवर्ग के अधिकारियों की वर्षवार संख्या एवं उनमें हुई वृद्धि की जानकारी मांगी गई है।

राज्य गठन के बाद जनसंख्या, अपराध और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुपात में पुलिस बल की संरचना कितनी बदली है, यह जानकारी सार्वजनिक होना आवश्यक है।

निर्धारित 30 दिनों की समय सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं करवाने पर इस प्रकरण में प्रथम अपील विभागीय पुलिस मुख्यालय उत्तराखंड में दिनांक 02//01/2026 को दायर की जा चुकी है,और आगे की कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।

यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पुलिस विभाग में अधिकारियों की संख्या और उनके अनुपात का सीधा संबंध कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक दक्षता और जन सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। अब देखना होगा कि पुलिस मुख्यालय इस जनहित की सूचना को कितनी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक करता है।

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