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ब्रेस्ट कैंसर से संबंधित गलत रिपोर्ट भेजने वाले दोषी रेडियोलॉजिस्ट व दोषी संस्था के विरुद्ध होगी कार्यवाही

*ब्रेस्ट कैंसर से संबंधित गलत रिपोर्ट भेजने वाले दोषी रेडियोलॉजिस्ट व दोषी संस्था के विरुद्ध होगी कार्यवाही*

देहरादून के दून अस्पताल में डिजिटल मैमोग्राफी मशीन लगाने के बाद भी मरीजों को ब्रेस्ट कैंसर की सही रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है क्योंकी मरीजों को ब्रेस्ट कैंसर था लेकिन रिपोर्ट सामान्य बताई जा रही है।

यह कि डॉक्टरों ने जांच की दूसरी प्रक्रिया अपनाई को ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि हुई, इस तरह के चार पांच मामले सामने आने के बाद मैमोग्राफी की जांच रिपोर्ट पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 

यह कि दून अस्पताल में डिजिटल मैमोग्राफी मशीन लगाने के बाद दावा किया गया था कि इससे ब्रेस्ट कैंसर की जांच आसान होगी। किसी महिला के ब्रेस्ट में अगर 1 सेंटीमीटर से कम की गांठ है इसका पता लगाया जा सकेगा, लेकिन फिलहाल ऐसा हो नहीं रहा है यह दावा भी असत्य साबित हो रहा है। 

यह कि सबसे मुख्य बात यह है कि दून अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉक्टर धनंजय डोभाल यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि एक निजी संस्था से टाईअप किया गया है। उसे मैमोग्राफी की रिपोर्ट ऑनलाइन भेजी जाती है, इसके बाद वहां से ऑनलाइन रिपोर्ट आती है तथा वहां का जो रेडियोलॉजिस्ट देख रहा है गलत रिपोर्ट दे रहा है और इस बारे में संस्था को बताया गया है, जबकि इतने गंभीर मामले में जो रेडियोलॉजिस्ट इस तरह गलत रिपोर्ट दे रहा है उसके विरूद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही के साथ कानूनी कार्यवाही भी की जानी चाहिए थी और संस्था के खिलाफ भी कड़ी से कड़ी कार्यवाही और कानूनी कार्यवाही की जानी थी, जोकि नही की गई क्योंकि यह स्पष्ट रूप से आम जनता की जनहानि से जुड़ा हुआ मामला है।

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केस नंबर एक :- 50 वर्षीय महिला के बाएं ब्रेस्ट में गांठ थी महिला ने दून अस्पताल के डॉक्टर को दिखाया तो शुरुआती जांच के बाद मैमोग्राफी की सलाह दी गई मैमोग्राफी की रिपोर्ट सामान्य बताई गई जबकि एफनेसी जांच में ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि हुई।

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केस नंबर दो :- 53 वर्षीय महिला के दोनों ब्रेस्ट में गांठ थी महिला ने दून अस्पताल के डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने कैंसर की आशंका जताते हुए मैमोग्राफी के लिए कहा, इसकी रिपोर्ट सामान्य आई जबकि एफनेसी जांच में ब्रेस्ट कैंसर का पता चला।

दून अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दोषी संस्था और उस दोषी रेडियोलॉजिस्ट के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई जबकि ब्रेस्ट कैंसर से संबंधित रिपोर्ट गलत भेजकर आमजन की जान खतरे में डाली जा रही थी।विरूद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही के साथ कानूनी कार्यवाही भी की जानी चाहिए थी और संस्था के खिलाफ भी कड़ी से कड़ी कार्यवाही और कानूनी कार्यवाही की जानी थी, जोकि नही की गई।

इस अत्यंत गंभीर प्रकरण में मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड के सदस्य आईपीएस राम सिंह मीना द्वारा तत्काल सुनवाई करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी देहरादून को आदेश जारी किए गए कि:-

आदेश:-

शिकायतकर्ता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी ने दून अस्पताल में ब्रेस्ट कैंसर की जांच में मैमोग्राफी की रिपोर्ट सामान्य होना, दूसरी जांच में ब्रेस्ट कैंसर होना तथा गम्भीर प्रकरण पर रिर्पोट तलब कर कड़ी कार्यवाही करने के सम्बन्ध में शिकायती पत्र प्रेषित किया गया है।

शिकायत की प्रति मुख्य चिकित्सा अधिकारी, देहरादून को प्रेषित कर दी जाए कि वह इस सम्बन्ध में जांच कराकर अपनी आख्या आगामी दिनांक तक आयोग के समक्ष दाखिल करेंगे।

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