पूर्व सूचना आयुक्त राजेन्द्र कोटियाल की शिकायत पर फुल बैंच ने किए सचिव पर्यटन और डीएम चमोली को नोटिस जारी
पूर्व सूचना आयुक्त उत्तराखंड तथा हाईकोर्ट उत्तराखंड के वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन्द्र कोटियाल की जनहित याचिका पर सचिव पर्यटन उत्तराखण्ड शासन एवं जिलाधिकारी चमोली को नोटिस जारी।
देहरादून: पूर्व सूचना आयुक्त उत्तराखंड तथा हाईकोर्ट उत्तराखंड के वरिष्ठ अधिवक्ता
राजेन्द्र कोटियाल द्वारा मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड द्वारा जनहित में बद्रीनाथ के निवासियों की भूमि, भवन व दुकानों का बलपूर्वक बिना अर्जन किये, बिना मुआवजा दिये व बिना पुर्नवास किये ध्वस्तीकरण करने संबंधी जनहित याचिका दायर की गई। राजेंद्र कोटियाल ने आयोग से अपेक्षा की है कि जिलाधिकारी, चमोली को आदेशित कर सूचना यह प्राप्त करें कि (1) मास्टर प्लान की अधिसूचना कब जारी हुई, (2) भूमि, भवन व दुकानों का अर्जन किस विधि से और कब किया गया, (3) यदि अर्जन नहीं किया गया तो ध्वस्तीकरण किस कानून के अन्र्तगत किया गया. (4) जिनकी भूमि, भवन व दुकानें ध्वस्त की गई उन्हें प्रतिकर भुगतान व पुर्नवास की क्या योजना है।
राजेंद्र कोटियाल की जनहित याचिका पर आयोग की फुल बैंच में आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति विजय कुमार बिष्ट (रिटायर्ड), सदस्य न्यायाधीश गिरधर सिंह धर्मशक्तु (रिटायर्ड), सदस्य आईपीएस राम सिंह मीना (रिटायर्ड) द्वारा आदेश जारी किए गए।
*आदेश*

राजेन्द्र कोटियाल का कथन है कि ध्वस्तीकरण बिना भूमि अर्जन के किया गया तथा बिना विधिक प्रक्रिया अपनाये भवन व दुकानें ध्वस्त कर दी गई जो कि मानव अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है। इस प्रकरण में नोटिस जारी किया गया तथा पर्यटन, सचिव उत्तराखण्ड शासन व जिलाधिकारी, चमोली द्वारा अपनी आख्याएं भी प्रस्तुत की गई। समस्त आख्याएं एंव शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत प्रतिउत्तर पत्रावली में उपलब्ध हैं। परंतु आज शासन का पक्ष रखने हेतु न तो पर्यटन सचिव की ओर से कोई उपस्थित हैं और न ही जिलाधिकारी, चमोली की ओर से कोई अधिकारी उपस्थित हैं।

राजेन्द्र कोटियाल द्वारा लगाये गये आरोप अगर सत्य पाये जाते हैं तो यह मानव अधिकारों का उल्लंघन माना जायेगा और ऐसी स्थिति में आयोग अपनी आख्या प्रस्तुत करेगा।

अतः सचिव, पर्यटन उत्तराखण्ड शासन एवं जिलाधिकारी, चमोली को नोटिस जारी कर आदेशित किया जाता है कि वे सुनवाई की आगामी दिनांक 19/8/2025 को उपरोक्त के सम्बन्ध में अपनी आख्याओं / समस्त दस्तावेजों सहित या तो स्वयं आयोग के समक्ष उपस्थित हों या अपने किसी वरिष्ठ भिज्ञ अधिकारियों को आयोग के समक्ष उपस्थित होने हेतु निर्देशित करें ताकि वे शासन का पक्ष आयोग के समक्ष प्रस्तुत कर सकें।




