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खुलासा:उत्तराखंड के देहरादून सहित 9 जिलों के 312 विद्यालयों के हजारों मासूम बच्चे तरस रहे पीने के पानी को

उत्तराखंड में पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं हजारों छात्र 611 विद्यालयों में नहीं है पीने के पानी की व्यवस्था जबकि 10 हजार करोड़ से अधिक का बजट है। 

 उपरोक्त मामले में मानवाधिकार, आरटीआई एवं सामाजिक कार्यकर्ता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी द्वारा मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड में जनहित याचिका दायर कर निवेदन किया गया कि “सरकारी विद्यालयों के हजारों छात्र पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। प्राथमिक से लेकर माध्यमिक तक 611 विद्यालयों में पेयजल की व्यवस्था नहीं है। इससे छात्र-छात्राओं को तमाम दिक्कतें हो रही हैं”।

“शिक्षा विभाग की ओर से विद्यालयों को हाईटेक बनाने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन तमाम सरकारी प्राथमिक, जूनियर हाईस्कूल और माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों के लिए बुनियादी सुविधा तक नहीं है। यह हाल तब है जबकि शिक्षा विभाग का हर साल का 10 हजार करोड़ से अधिक का बजट है। शिक्षा गुणवत्ताके नाम पर विभाग में अक्सर तमाम प्रयोग किए जाते रहे हैं। इसके बावजूद 611 विद्यालयों के हजारों ‘बच्चे बरसात के इस मौसम में पीने के पानी को तरस रहे हैं”।

“शिक्षा विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक 456 प्राथमिक विद्यालयों, 96 जूनियर हाईस्कूलों और 59 माध्यमिक विद्यालयों में पेयजल की व्यवस्था नहीं है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक रामकृष्ण उनियाल के मुताबिक कुछ विद्यालयों की पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने और पेयजल स्रोत स्कूल से नीचे होने की वजह से समस्या बनी है। समस्या के निपटारे के लिए जल संस्थान को सभी विद्यालयों की सूची उपलब्ध करा दी गई है। जल जीवन मिशन के तहत सभी विद्यालयों में पेयजल लाइन दी गई है। वन क्षेत्र में बने विद्यालयों में सुविधाएं नहीं हैं। इन विद्यालयों में वैकल्पिक व्यवस्था की गई है”।

“अल्मोड़ा जिले के 77, बागेश्वर में सात, चंपावत में 49, देहरादून में 21, हरिद्वार में तीन, नैनीताल में 41, पौड़ी में 49, पिथौरागढ़ में 79, रुद्रप्रयाग में 33, टिहरी में 42, ऊधमसिंहनगर में चार और उत्तरकाशी जिले के 41 प्राथमिक विद्यालयों में पेयजल समस्या बनी है”। 

 अत: माननीय महोदय जी से निवेदन हैं कि शिकायत का विषय बहुत ही गंभीर ओर स्पष्ट रूप से मानवाधिकारों के उल्लंघन का है इसलिए जनहित में रिपोर्ट तलब कर तत्काल कार्यवाही करने की कृपा करें।

मानवाधिकार आयोग के सदस्य राम सिंह मीना द्वारा जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए निदेशक प्राथमिक शिक्षा को आदेशित किया गया।

*आदेश -*

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शिकायतकर्ता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी H-255 नेहरू कॉलोनी देहरादून ने सरकारी विद्यालयों के प्राथमिक से लेकर माध्यमिक तक 611 विद्यालयों में पेयजल की व्यवस्था न होने, कुछ विद्यालयों के पेय जल लाईन क्षतिग्रस्त होने, तथा जनहित में रिपोर्ट तलब कराकर तत्काल कार्यवाही कराये जाने के सम्बन्ध में शिकायती पत्र प्रेषित किया गया है।

शिकायती पत्र की प्रति निदेशक, प्राथमिक शिक्षा देहरादून को प्रेषित कर दी जाए, कि वह इस सम्बन्ध में अपनी आख्या आगामी दिनांक तक आयोग के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

पत्रावली 6.11.2024 को प्रस्तुत हो।

सुनवाई की तारीख पर प्राथमिक शिक्षा निदेशक द्वारा इस अत्यंत ही गंभीर मामले में आयोग में अपनी आख्या प्रस्तुत ना करने पर आयोग के सदस्य राम सिंह मीना द्वारा कड़े निर्देश जारी किए गए।

*आदेश-*

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निदेशक, प्राथमिक शिक्षा देहरादून द्वारा आख्या प्रस्तुत नहीं की गई है। पुनः नोटिस जारी हो कि वह आगामी दिनांक तक अवश्य ही इस सबंध में अपनी आख्या आयोग के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। आख्या प्रस्तुत न करने की स्थिति में वह आगामी दिनांक को किसी वरिष्ठ भिज्ञ अधिकारी को समस्त दस्तावेजों सहित आयोग में उपस्थित होने हेतु निर्देशित करेंगे जिससे कि उनका सशपथ बयान अंकित हो सके।

पत्रावली 28.4.2025 को प्रस्तुत हो।

*निदेशक, प्राथमिक शिक्षा ननूरखेड़ा देहरादून उत्तराखंड द्वारा आयोग में प्रस्तुत की गई अपनी आख्या-*

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आयोग के निर्देशों के बाद निदेशक, प्राथमिक शिक्षा ननूरखेड़ा देहरादून उत्तराखंड द्वारा आयोग में प्रस्तुत की गई अपनी आख्या में अंकित किया गया है कि “प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत वर्तमान में 11233 राजकीय प्राथमिक विद्यालय एवं 2482 राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित है। वर्तमान स्थिति के अनुसार पेयजल लाईन क्षतिग्रस्त होने, विद्यालय के समीपस्थ हैण्डपम्प की व्यवस्था होने एवं पेयजल श्रोत अत्याधिक दूर होने तथा पेयजल श्रोत से विद्यालय अधिक ऊँचाई पर होने के कारण निम्नवत् विवरणानुसार उत्तराखंड के 9 जिलों

रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी, देहरादून,चंपावत, नैनीताल तथा अल्मोड़ा के 312 जिलों विद्यालयों में पेयजल की समस्या बनी हुई है, और दिनांक 22 अप्रैल 2025 को समस्त जनपदाधिकारियों को विद्यालयों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल संयोजन कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं”।

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प्राथमिक शिक्षा ननूरखेड़ा देहरादून उत्तराखंड द्वारा आयोग में प्रस्तुत की गई आख्या के विरुद्ध भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी द्वारा दिनांक 30/7/2025 को अपना प्रतिउत्तर दिया गया है।

*प्रतिउत्तर-*

माननीय महोदय जी से निवेदन है कि श्रीमान निदेशक प्रारंभिक शिक्षा उत्तराखंड ननूरखेड़ा,देहरादून द्वारा अपनी आख्या में अंकित किया गया है कि राज्य के 9 जिलों के 312 विद्यालयों में पेयजल नहीं है और जनपदाधिकारियों को विद्यालयों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल संयोजन कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं, इस रिपोर्ट के अनुसार यह मामला बहुत ही गम्भीर तथा जनहित का तथा स्पष्ट रूप से इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के मानवाधिकारों के उल्लंघन और उनकी प्यास से जुड़ा हुआ है,इसलिए कृपा कर श्रीमान निदेशक प्रारंभिक शिक्षा के निर्देशों के बाद क्या कार्यवाही की गई उसकी रिपोर्ट तलब कर कार्रवाई करने की कृपा करें।

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