लड्डू गोपाल की छठी: महत्व पूजा विधि और उत्सव
*लड्डू गोपाल की छठी: महत्व पूजा विधि और उत्सव*
लड्डू गोपाल, भगवान श्रीकृष्ण का बाल स्वरूप,भक्तों के दिलों में विशेष स्थान रखते हैं। जन्माष्टमी के उत्सव के बाद, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को लड्डू गोपाल की छठी मनाई जाती है। यह दिन भगवान कृष्ण के जन्म के छठे दिन के रूप में महत्वपूर्ण है, जब माता यशोदा ने अपने लाल की छठी का उत्सव मनाया था। इस वर्ष 2025 में, जन्माष्टमी 16 अगस्त को मनाई गई, इसलिए लड्डू गोपाल की छठी 21 अगस्त को मनाई जाएगी। आइए, इस पवित्र दिन के महत्व, पूजा विधि और उत्सव की विशेषताओं को विस्तार से समझें।
लड्डू गोपाल की छठी का महत्व
हिंदू परंपरा में, किसी भी नवजात शिशु की छठी का विशेष महत्व होता है। यह दिन बच्चे के स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना के लिए मनाया जाता है। ठीक उसी तरह, लड्डू गोपाल की छठी उनके बाल स्वरूप की पूजा और उनके प्रति भक्ति को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और आनंद की प्राप्ति होती है। यह दिन भक्तों को लड्डू गोपाल के प्रति अपनी श्रद्धा और प्रेम को व्यक्त करने का अवसर देता है।
*#पूजा विधि#*
लड्डू गोपाल की छठी का उत्सव भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। नीचे दी गई पूजा विधि का पालन कर आप इस दिन को और भी विशेष बना सकते हैं:
प्रातः स्नान और तैयारी:
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल को साफ करें और गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।
लड्डू गोपाल का अभिषेक:
लड्डू गोपाल की मूर्ति को एक पवित्र पात्र में स्थापित करें।
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर का मिश्रण और गंगाजल से उनका अभिषेक करें।
अभिषेक के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
*#वस्त्र और आभूषण#*
अभिषेक के बाद लड्डू गोपाल को नए वस्त्र और आभूषण पहनाएं। पीले या लाल रंग के वस्त्र विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।
उन्हें फूलों का हार, चंदन का तिलक और तुलसी पत्र अर्पित करें।
*#भोग#*
लड्डू गोपाल को कढ़ी-चावल, माखन-मिश्री, और लड्डू का भोग लगाएं। भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें, क्योंकि यह भगवान कृष्ण को अति प्रिय है।
भक्त अपनी श्रद्धा अनुसार अन्य मिठाइयां भी अर्पित कर सकते हैं।
*#आरती और भक्ति भजन#*
पूजा के अंत में लड्डू गोपाल की आरती करें। “श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी” जैसे भक्ति भजनों का गायन करें।
परिवार के साथ मिलकर भगवान की कथाओं और लीलाओं का स्मरण करें।
*#प्रसाद वितरण#*
पूजा के बाद भोग को प्रसाद के रूप में परिवार और पड़ोसियों में बांटें। यह प्रसाद सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
*#उत्सव का माहौल#*
लड्डू गोपाल की छठी का उत्सव घरों में उत्साह और भक्ति का माहौल लाता है। कई भक्त इस दिन घर को फूलों, रंगोली और दीयों से सजाते हैं। बच्चे और बड़े मिलकर लड्डू गोपाल की झांकी सजाते हैं, जिसमें उन्हें पालने में झुलाया जाता है। यह दृश्य भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं को जीवंत करता है। कुछ स्थानों पर सामूहिक भजन-कीर्तन और कथा का आयोजन भी किया जाता है।
*#मान्यताएं और लाभ#*
ऐसी मान्यता है कि लड्डू गोपाल की छठी की पूजा करने से भक्तों के घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह पूजा न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है, बल्कि परिवार में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की वृद्धि भी करती है। जो भक्त लड्डू गोपाल को अपने घर में संतान के रूप में पूजते हैं, उनके लिए यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है।
लड्डू गोपाल की छठी भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति का एक सुंदर अवसर है। यह दिन हमें उनकी बाल लीलाओं और उनके प्रति श्रद्धा को याद करने का मौका देता है। 21 अगस्त 2025 को इस पवित्र दिन को पूरे उत्साह और विधि-विधान के साथ मनाएं। लड्डू गोपाल की कृपा से आपका जीवन आनंद, शांति और समृद्धि से परिपूर्ण हो।
🙏जय श्री कृष्ण राधे राधे



