Human Rights

हरिद्वार जिला अस्पताल की मोर्चरी में अमानवीय लापरवाही, डीप फ्रीजर में रखे शव को चूहों ने कुतरा, मानवाधिकार आयोग ने तलब की रिपोर्ट

हरिद्वार जिला अस्पताल की मोर्चरी में अमानवीय लापरवाही, डीप फ्रीजर में रखे शव को चूहों ने कुतरा, मानवाधिकार आयोग ने तलब की रिपोर्ट

*#“जो लावारिस शवों को सम्मान देता रहा, उसी समाजसेवी की देह मोर्चरी में चूहों ने नोच डाली”#*

*# “देहदान का संकल्प, पर देह की बेकद्री”#*

*#लखन शर्मा उर्फ लकी ने देहदान और नेत्रदान का लिया था संकल्प#*

*#यदि मोर्चरी व्यवस्था दुरुस्त होती, तो कई लोगों को जीवन मिल सकता था#*

*#स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने देहदान जैसे पवित्र संकल्प को विफल कर दिया#*

*बड़े सवाल :*

*#(1) क्या प्रशासन की लापरवाही से किसी का देहदान रुक जाना अपराध नहीं है?#*

*#(2) क्या मृत शरीर भी राज्य के लिए “द्वितीय श्रेणी नागरिक” है?#*

देहरादून:जिला अस्पताल हरिद्वार में स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही का एक बेहद शर्मनाक, अमानवीय और संवेदनशील मामला सामने आया है। अस्पताल की मोर्चरी में खराब डीप फ्रीजर में रखे पंजाबी धर्मशाला के मैनेजर एवं समाजसेवी लखन शर्मा उर्फ लकी का शव करीब 18 घंटे तक पड़ा रहा, इस दौरान चूहों ने शव को कई जगह से कुतर दिया, यहां तक कि आंखें भी नोच ली गईं।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें यह कहकर गुमराह किया कि डीप फ्रीजर पूरी तरह ठीक है, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट थी। इस हृदयविदारक घटना ने न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी शर्मसार कर दिया है।

सबसे दुखद पहलू यह है कि लखन शर्मा ने देहदान और नेत्रदान का संकल्प लिया हुआ था, लेकिन इस लापरवाही के चलते उनकी देह समाज के किसी काम नहीं आ सकी। गौरतलब है कि लखन शर्मा ने अपना जीवन लावारिस शवों के अंतिम संस्कार में समर्पित कर दिया था, लेकिन अंत में उन्हीं की देह के साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार हुआ।

यह भी उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 जून माह में जिला अस्पताल की मोर्चरी में शवों के सड़ने का मामला सामने आया था, जिसके बाद जिलाधिकारी हरिद्वार ने मोर्चरी सुधार एवं नए डीप फ्रीजरों की खरीद के लिए लगभग 10 लाख रुपये की स्वीकृति दी थी। बावजूद इसके न तो नई खरीद हुई और न ही पुराने डीप फ्रीजरों की मरम्मत कराई गई।

चौंकाने वाली बात यह भी है कि कई वर्षों से जिला अस्पताल की मोर्चरी बिना छत के संचालित हो रही है, जहां 19 शव रखने की व्यवस्था है और डीप फ्रीजर खुले बरामदे में रखे हुए हैं। चिकित्सक वर्ग भी इस स्थिति पर हैरानी जताता रहा है कि कहीं भी इस तरह टिन शेड में मोर्चरी संचालित नहीं होती।

मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तराखण्ड मानवाधिकार आयोग ने शिकायतकर्ता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी की शिकायत पर संज्ञान लिया है। आयोग ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी, हरिद्वार से आख्या तलब करते हुए अगली तिथि तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

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मानवाधिकार आयोग के सदस्य राम सिंह मीना द्वारा पारित आदेश ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। यह मामला न केवल प्रशासनिक जवाबदेही बल्कि मानव गरिमा और अधिकारों की रक्षा का भी बड़ा परीक्षण बन गया है।

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