Human Rights

देहरादून में ध्वनि प्रदूषण पर मानवाधिकार आयोग सख्त

फेरीवालों के लाउडस्पीकर पर शिकायत के बाद सिटी मजिस्ट्रेट को दोबारा नोटिस, कार्रवाई न हुई तो आयोग पारित करेगा उचित आदेश

देहरादून में ध्वनि प्रदूषण पर मानवाधिकार आयोग सख्त

फेरीवालों के लाउडस्पीकर पर शिकायत के बाद सिटी मजिस्ट्रेट को दोबारा नोटिस, कार्रवाई न हुई तो आयोग पारित करेगा उचित आदेश

देहरादून में फेरीवालों के लाउडस्पीकर से ध्वनि प्रदूषण पर मानवाधिकार आयोग सख्त, कार्रवाई नहीं हुई तो पारित होंगे उचित आदेश

13 अप्रैल की जनहित शिकायत पर 23 अप्रैल को हुआ था आदेश, अनुपालन न होने पर 6 अगस्त को सिटी मजिस्ट्रेट को फिर जारी किया गया नोटिस

देहरादून:शहर की गलियों और कॉलोनियों में फेरीवालों एवं ठेली वालों द्वारा लाउडस्पीकर के कथित अनियंत्रित इस्तेमाल से होने वाले ध्वनि प्रदूषण का मामला अब उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग तक पहुंचने के बाद महत्वपूर्ण मोड़ पर है। 

आयोग ने मामले में पहले आदेश पारित किए और अपेक्षित आख्या प्रस्तुत न किए जाने के बाद दोबारा नोटिस जारी किया। इस नोटिस में आयोग ने स्पष्ट किया है कि उसके आदेश के अनुरूप कार्रवाई नहीं किए जाने की स्थिति में विचारोपरांत यथोचित आदेश पारित किए जाएंगे।

यह मामला सामाजिक, आरटीआई एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी द्वारा 13 अप्रैल 2026 को आयोग के समक्ष प्रस्तुत जनहित शिकायत से जुड़ा है। 

शिकायत में देहरादून के विभिन्न मोहल्लों और कॉलोनियों में सब्जी, फल, कपड़े, बर्तन तथा खाद्य सामग्री बेचने वाले कुछ फेरीवालों एवं ठेली वालों द्वारा तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाए जाने की समस्या उठाई गई थी।

23 अप्रैल को आयोग ने दिया था आदेश

शिकायत पर संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग ने 23 अप्रैल 2026 को आदेश पारित किया। 

आदेश में शिकायत की प्रति नगर मजिस्ट्रेट, देहरादून को भेजने तथा निर्धारित तिथि तक आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। आदेश में पत्रावली को 6 अगस्त 2026 को प्रस्तुत करने का उल्लेख था।

अनुपालन न होने पर 6 अगस्त को फिर जारी हुआ नोटिस

आयोग के 6 अगस्त 2026 के आदेश में उल्लेख किया गया कि नगर मजिस्ट्रेट, देहरादून की ओर से आख्या प्रस्तुत नहीं की गई है। इसके बाद पुनः नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया गया कि निर्धारित तिथि तक आवश्यक आख्या प्रस्तुत की जाए। पत्रावली को आगे की सुनवाई के लिए 18 नवंबर 2026 को पेश करने का उल्लेख भी किया गया।

नोटिस की यह टिप्पणी है सबसे महत्वपूर्ण

आयोग की ओर से नगर मजिस्ट्रेट, देहरादून को जारी नोटिस में दर्ज यह टिप्पणी मामले को विशेष महत्व देती है।

*#“विदित हो कि आयोग के उपरोक्त आदेश की अपेक्षानुरूप कार्यवाही न किए जाने की स्थिति में आयोग द्वारा विचारोपरान्त यथोचित आदेश पारित कर दिए जायेंगे।”#*

*#बुजुर्गों, मरीजों और विद्यार्थियों की परेशानी का मुद्दा#*

शिकायत में कहा गया था कि तेज आवाज में लगातार लाउडस्पीकर बजने से बीमार एवं बुजुर्ग लोगों को परेशानी होती है। विद्यार्थियों की पढ़ाई और एकाग्रता प्रभावित होती है, जबकि रात्रि ड्यूटी करने वाले व्यक्तियों के आराम में भी बाधा आती है। शिकायतकर्ता ने ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की थी।

अब 18 नवंबर की तारीख पर टिकी निगाहें

यह मामला केवल लाउडस्पीकर की तेज आवाज तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण के नियंत्रण और नागरिकों को शांतिपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराने से भी जुड़ा है। अब महत्वपूर्ण यह होगा कि संबंधित अधिकारी आयोग के निर्देशों के अनुरूप क्या कार्रवाई करते हैं और निर्धारित तिथि तक आवश्यक आख्या प्रस्तुत की जाती है या नहीं।

जनहित का सवाल: क्या शहरवासियों को अनियंत्रित ध्वनि प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे? आयोग के आदेशों के अनुपालन और अगली सुनवाई में प्रस्तुत होने वाली आख्या से इस मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होगी।

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