Specific

राजनीति से ऊपर है इंसान की जिंदगी: आयुष्मान योजना

"गंभीर बीमारी में बिक जाती है जीवनभर की जमा-पूंजी, जमीन और मकान तक दांव पर लग जाते हैं,ऐसे में गरीब परिवारों के लिए आयुष्मान योजना बनी बड़ी उम्मीद"

राजनीति से ऊपर है इंसान की जिंदगी:आयुष्मान योजना, गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं

बीमारी कभी किसी व्यक्ति की जाति, धर्म, आर्थिक स्थिति या राजनीतिक विचारधारा देखकर नहीं आती। बीमारी जब किसी परिवार के दरवाजे पर दस्तक देती है, तो कई बार उस परिवार की वर्षों की जमा-पूंजी कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाती है।

गंभीर बीमारी के इलाज में लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं। किसी को अपनी जमीन बेचनी पड़ती है, कोई मकान गिरवी रख देता है तो कोई अपने बच्चों के भविष्य के लिए जमा की गई पूंजी इलाज में लगा देता है। कई परिवार तो इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ होने के कारण कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं।

Oplus_16908288

ऐसे हालात में आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा बनकर सामने आई है।

स्वास्थ्य सुविधा, हर पात्र जरूरतमंद का अधिकार

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में 23 सितंबर 2018 को शुरू की गई इस योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में भर्ती होकर उपचार कराने के लिए प्रतिवर्ष प्रति परिवार ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य कवर उपलब्ध कराया जाता है।

इस योजना का उद्देश्य केवल इलाज की सुविधा देना नहीं, बल्कि गरीब परिवारों को गंभीर बीमारी के कारण आर्थिक रूप से टूटने से बचाना भी है।

उत्तराखंड की बात करें तो यहां आयुष्मान भारत योजना के साथ राज्य सरकार ने अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के माध्यम से स्वास्थ्य सुरक्षा का दायरा बढ़ाया है। यह प्रदेश के लिए भी एक महत्वपूर्ण पहल है।

पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के सामने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने की अतिरिक्त चुनौतियां हैं। कई बार मरीजों को बेहतर उपचार के लिए देहरादून, ऋषिकेश, हल्द्वानी या दूसरे राज्यों के बड़े अस्पतालों तक जाना पड़ता है। ऐसे में स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का महत्व और बढ़ जाता है।

बीमारी में पार्टी नहीं, इलाज की जरूरत देखी जाती है

यहां एक महत्वपूर्ण सवाल समाज के सामने रखना जरूरी है।

जब कोई व्यक्ति आयुष्मान योजना के अंतर्गत पात्र होता है और उसे इस योजना के माध्यम से अस्पताल में इलाज की सुविधा मिलती है, तो क्या उससे यह पूछा जाता है कि वह भाजपा का समर्थक है, कांग्रेस का कार्यकर्ता है या किसी अन्य राजनीतिक दल से जुड़ा है?

नहीं।

योजना का लाभ निर्धारित पात्रता के आधार पर मिलता है, राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं।

फिर हम किसी जनकल्याणकारी योजना को केवल राजनीतिक चश्मे से क्यों देखें?

यदि किसी कांग्रेस समर्थक के परिवार के सदस्य का आयुष्मान योजना से इलाज होता है, तो यह भी उतनी ही अच्छी बात है जितनी किसी भाजपा समर्थक के परिवार के सदस्य का इलाज होना।

आखिरकार बीमारी से राहत पाने वाला व्यक्ति एक इंसान है, किसी राजनीतिक दल का प्रतिनिधि नहीं।

सरकार की आलोचना का अधिकार है, लेकिन अच्छे काम की सराहना भी होनी चाहिए

लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। सरकार की कमियों, अस्पतालों की अव्यवस्थाओं, इलाज में लापरवाही, भुगतान में देरी और योजना के क्रियान्वयन में गड़बड़ियों पर सवाल उठने ही चाहिए।

लेकिन क्या यह उचित नहीं होगा कि हम अच्छे कार्यों को भी स्वीकार करें?

यदि किसी योजना से किसी गरीब परिवार का घर बिकने से बचता है, किसी पिता को अपने बेटे का इलाज कराने में मदद मिलती है, किसी मां को अपने बच्चे के उपचार की उम्मीद मिलती है और किसी बुजुर्ग को आर्थिक चिंता से राहत मिलती है, तो उस जनकल्याणकारी पहल की सराहना होनी चाहिए।

अच्छे कार्य की प्रशंसा करने से किसी की राजनीतिक विचारधारा नहीं बदल जाती।

योजना का लाभ मिले, लेकिन व्यवस्था भी पारदर्शी और जवाबदेह हो

यह भी आवश्यक है कि आयुष्मान योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध अस्पताल मरीजों के साथ उचित व्यवहार करें। पात्र मरीजों को नियमानुसार उपचार मिले, उनसे अनुचित धनराशि न मांगी जाए, अस्पतालों के दावों और सरकारी भुगतान में पारदर्शिता रहे तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पर सख्त कार्रवाई हो।

क्योंकि योजना का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब इसका लाभ अंतिम पात्र व्यक्ति तक बिना परेशानी पहुंचे।

अंत में समाज से एक अपील

हम सभी को यह समझना होगा कि राजनीति अपनी जगह है और इंसान की जिंदगी अपनी जगह।

आज जिस परिवार को आयुष्मान योजना की जरूरत है, कल वह परिवार हमारा भी हो सकता है। बीमारी और आर्थिक संकट किसी को बताकर नहीं आते।

इसलिए किसी भी सरकार की जनहितकारी योजना का मूल्यांकन राजनीतिक पसंद-नापसंद से नहीं, बल्कि उससे आम नागरिक को मिलने वाले लाभ के आधार पर होना चाहिए।

प्रधानमंत्री किसी एक राजनीतिक दल के समर्थकों के ही नहीं, पूरे देश के प्रधानमंत्री होते हैं। इसी प्रकार जनकल्याण के लिए बनाई गई पात्रता आधारित स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ भी राजनीतिक भेदभाव से ऊपर उठकर मिलना चाहिए।

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि किसी गरीब की बची हुई जमीन, किसी परिवार का बचा हुआ मकान और किसी मां-बाप के चेहरे पर लौटी मुस्कान का मूल्य किसी राजनीतिक बहस से कहीं अधिक है।

राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इंसान की जिंदगी के मामले में हमारा दृष्टिकोण एक होना चाहिए।

क्योंकि आखिरकार “राजनीति से बड़ा इंसान है, विचारधारा से बड़ा जीवन है और किसी जरूरतमंद की जान बचाने से बड़ा कोई जनकल्याण नहीं।”

भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी

सामाजिक,आरटीआई एवं मानवाधिकार एक्टिविस्ट देहरादून,उत्तराखंड

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button