स्कूल में छात्राएं कितनी सुरक्षित? समरवैली प्रकरण ने खड़े किए गंभीर सवाल
मैनेजर-प्रिंसिपल समेत 4 पर मुकदमा
स्कूल में छात्राएं कितनी सुरक्षित? समरवैली प्रकरण ने खड़े किए गंभीर सवाल, मैनेजर-प्रिंसिपल समेत 4 पर मुकदमा
फिजिक्स शिक्षक पर 11वीं की छात्रा से छेड़छाड़ और अनुचित व्यवहार का आरोप, स्कूल प्रबंधन पर दबाव बनाने के आरोप भी; 15 छात्राओं की शिकायत का दावा, अब पुराने छात्र भी सामने आए
देहरादून। शिक्षण संस्थान बच्चों के भविष्य को संवारने और उन्हें सुरक्षित वातावरण देने के लिए होते हैं, लेकिन जब किसी स्कूल के भीतर ही छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगें तो यह पूरे शिक्षा तंत्र के लिए चिंता का विषय बन जाता है। देहरादून के समरवैली स्कूल से सामने आया मामला भी कुछ ऐसे ही गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
स्कूल की 11वीं कक्षा की एक छात्रा के साथ कथित छेड़छाड़ और अनुचित व्यवहार के मामले में डालनवाला पुलिस ने स्कूल के मैनेजर, प्रिंसिपल और संबंधित शिक्षक समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने जांच के लिए टीम गठित की है।
डेढ़ माह तक परेशान करने का आरोप, अनुचित तरीके से छूने की शिकायत
छात्रा की मां की ओर से पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार, स्कूल के फिजिक्स शिक्षक रविंदर भृगु पर उनकी बेटी को करीब डेढ़ माह से परेशान करने और अनुचित तरीके से छूने के आरोप लगाए गए हैं। परिवार का आरोप है कि शिक्षक का व्यवहार केवल उनकी बेटी तक सीमित नहीं था, बल्कि कक्षा की अन्य छात्राएं भी उनके व्यवहार से असहज थीं।
शिकायत में एक बेहद महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर 15 छात्राओं के हस्ताक्षर वाली शिकायत पहले ही स्कूल के प्रिंसिपल को दी गई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि छात्राओं ने पहले ही अपनी परेशानी स्कूल प्रबंधन के संज्ञान में ला दी थी, तो उस शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई? क्या छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया?
शिकायत के बाद स्कूल प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल
छात्रा की मां ने शिक्षक के कथित अनुचित व्यवहार के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। तहरीर के अनुसार, शिक्षक की शिकायत के बाद स्कूल प्रबंधन की ओर से उन पर दबाव बनाने का आरोप है।
मामले ने शुक्रवार को उस समय तूल पकड़ लिया, जब छात्रा की मां स्कूल पहुंचीं और कार्रवाई की मांग की। इसके बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए मुकदमा दर्ज किया और जांच शुरू कर दी।
अब पुराने छात्र भी सामने आए, सोशल मीडिया पर साझा किए अनुभव
इस मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया, जब आरोपी शिक्षक के पूर्व में पढ़ाए गए स्कूलों के कुछ पुराने छात्रों ने भी इंटरनेट मीडिया पर अपने अनुभव साझा करने शुरू कर दिए।
वर्ष 2005 से 2019 के बीच शहर के तीन प्रतिष्ठित निजी स्कूलों से जुड़े पूर्व छात्रों के नाम से साझा की जा रही प्रतिक्रियाओं में शिक्षक के कथित व्यवहार को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इन पोस्ट में दावा किया गया है कि पूर्व में भी छात्राओं को उनके व्यवहार से परेशानी होती थी।
कुछ पूर्व छात्रों ने यह आरोप भी लगाया है कि शिक्षक का विरोध करने वाले विद्यार्थियों को फेल करने की धमकी दी जाती थी अथवा उनके शैक्षणिक परिणाम प्रभावित किए जाते थे।
हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक जांच होना अभी बाकी है। इन अनुभवों ने एक अहम सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या पूर्व में भी ऐसी शिकायतें सामने आई थीं और यदि आई थीं तो उनकी जांच क्यों नहीं हुई?
तीन स्कूलों के पुराने बैचों का भी उल्लेख
सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे अनुभवों में डालनवाला स्थित एक निजी स्कूल के वर्ष 2005 के बैच, कर्जन रोड स्थित स्कूल के वर्ष 2008-09 के बैच और आईएसबीटी के पास स्थित एक निजी स्कूल के वर्ष 2014 से 2019 के बीच के विद्यार्थियों का उल्लेख किया जा रहा है।
यदि इन दावों में तथ्यात्मक आधार मिलता है तो यह केवल एक स्कूल या एक शिकायत तक सीमित मामला नहीं रह जाएगा, बल्कि विभिन्न शिक्षण संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा और शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था की भी गंभीर समीक्षा आवश्यक हो सकती है।
सबसे बड़ा सवाल: 15 छात्राओं की शिकायत पर क्या हुआ?
इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण सवाल केवल वर्तमान शिकायत तक सीमित नहीं है। यदि वास्तव में 15 छात्राओं ने हस्ताक्षर कर शिक्षक के व्यवहार को लेकर शिकायत दी थी, तो उस शिकायत की तारीख, उसकी प्राप्ति, उस पर की गई कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए भयमुक्त और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना भी है। किसी भी छात्रा की शिकायत को हल्के में लेना या शिकायतकर्ता परिवार पर दबाव बनाने का प्रयास, यदि जांच में सही पाया जाता है, तो इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
जांच से सामने आए सच्चाई, छात्राओं की सुरक्षा सर्वोपरि
अब पुलिस जांच से यह स्पष्ट होना जरूरी है कि छात्रा की शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता क्या है, पूर्व छात्रों के दावों में कितनी सच्चाई है और स्कूल प्रबंधन की भूमिका क्या रही है।
यह मामला किसी एक शिक्षक या स्कूल तक सीमित चर्चा का विषय नहीं होना चाहिए। प्रत्येक शिक्षण संस्थान में ऐसी पारदर्शी शिकायत व्यवस्था होनी चाहिए, जहां छात्राएं बिना भय, दबाव या प्रतिशोध की आशंका के अपनी बात रख सकें।
क्योंकि स्कूल की प्रतिष्ठा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और उनका भविष्य है।



