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देहरादून की सड़कों पर बेखौफ ई-रिक्शा,प्रतिबंधित मार्गों से लेकर नाबालिग चालकों तक यात्रियों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

प्रतिबंधित मार्गों पर ई-रिक्शा का खेल, आयोग ने दिए आरटीओ को कार्रवाई के निर्देश

*देहरादून की सड़कों पर बेखौफ ई-रिक्शा,प्रतिबंधित मार्गों से लेकर नाबालिग चालकों तक यात्रियों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल*

*प्रतिबंधित मार्गों पर ई-रिक्शा का खेल, आयोग ने दिए आरटीओ को कार्रवाई के निर्देश*

 

देहरादून:शहर की सड़कों पर दौड़ रहे ई-रिक्शा को लेकर एक बार फिर यात्रियों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रतिबंधित मार्गों पर ई-रिक्शा संचालन, नाबालिग चालकों द्वारा वाहन चलाने, फिटनेस समाप्त हो चुके वाहनों के संचालन और सड़क पर बेतरतीब ई-रिक्शा खड़े किए जाने से जुड़ी शिकायत अब उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग तक पहुंची है।

मामला उस समय गंभीर हो गया जब ई-रिक्शा संचालन से जुड़ी विभिन्न अनियमितताओं को लेकर प्रकाशित समाचार को आधार बनाते हुए सामाजिक, आरटीआई एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी ने उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग में जनहित शिकायत प्रस्तुत की है।

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शिकायत में कहा गया कि देहरादून के कई प्रमुख मार्गों पर ई-रिक्शा संचालन प्रतिबंधित होने के बावजूद बड़ी संख्या में ई-रिक्शा इन मार्गों पर संचालित हो रहे हैं। शिकायत में क्लेमेनटाउन, सहारनपुर रोड, झाझरा, प्रेमनगर, चकराता रोड, आईएसबीटी, हरिद्वार बाईपास और मोहकमपुर जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है।

*नाबालिग चालक चला रहे ई-रिक्शा, सुरक्षा पर बड़ा सवाल*

मामले का सबसे चिंताजनक पहलू नाबालिग चालकों द्वारा ई-रिक्शा चलाने का आरोप है। शिकायत में कहा गया है कि कई स्थानों पर नाबालिग चालक ई-रिक्शा संचालित करते दिखाई देते हैं। ऐसे में सवाल केवल यातायात नियमों का नहीं, बल्कि ई-रिक्शा में बैठने वाले यात्रियों और सड़क पर चल रहे अन्य लोगों की सुरक्षा का भी है।

इसके साथ ही फिटनेस प्रमाणपत्र की वैधता समाप्त हो चुके वाहनों के सड़क पर संचालन को लेकर भी शिकायत में गंभीर चिंता जताई गई है। यदि कोई वाहन निर्धारित सुरक्षा मानकों को पूरा किए बिना यात्रियों को ढो रहा है तो उसकी जवाबदेही और नियमित जांच को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

*सड़क बनी पार्किंग, बढ़ता जा रहा जाम*

शिकायत में ई-रिक्शा चालकों द्वारा सड़कों और प्रमुख मार्गों पर वाहन खड़े कर यातायात बाधित करने का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि कई स्थानों पर ई-रिक्शा चालक सड़क के किनारे या सड़क पर ही वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे यातायात का दबाव बढ़ता है और जाम की स्थिति पैदा होती है।

*ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि नियम मौजूद हैं तो उनका पालन कौन सुनिश्चित करेगा?*

*मानवाधिकार आयोग ने आरटीओ को भेजी शिकायत*

मामले में उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग ने शिकायत की प्रति संभागीय परिवहन अधिकारी, देहरादून को भेजते हुए निर्देश दिए कि प्रकरण में विधिनुसार एवं नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।

*अब निगाहें परिवहन विभाग की कार्रवाई पर हैं।* 

सवाल यह है कि प्रतिबंधित मार्गों पर चल रहे ई-रिक्शा, नाबालिग चालकों और फिटनेस विहीन वाहनों की वास्तविक स्थिति की जांच होगी या नहीं? यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाएगी?

*क्योंकि सवाल सिर्फ ई-रिक्शा के संचालन का नहीं, बल्कि उन हजारों यात्रियों की सुरक्षा का है जो रोज इन वाहनों में सफर करते हैं। नाबालिग चालक, फिटनेस विहीन वाहन और प्रतिबंधित मार्गों पर संचालन जैसे आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सीधे सड़क सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।*

अब देखना यह है कि मानवाधिकार आयोग के निर्देश के बाद परिवहन विभाग इस पूरे मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और देहरादून की सड़कों पर नियमों की अनदेखी करने वाले ई-रिक्शा संचालकों के विरुद्ध क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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