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देहरादून मच्छी बाजार हत्याकांड: पुलिस लापरवाही पर मानवाधिकार आयोग सख्त, डीजीपी से मांगी निष्पक्ष जांच रिपोर्ट

यदि समय रहते पुलिस आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करती, तो शायद एक निर्दोष युवती की जान बचाई जा सकती थी

देहरादून मच्छी बाजार हत्याकांड: पुलिस लापरवाही पर मानवाधिकार आयोग सख्त, डीजीपी से मांगी निष्पक्ष जांच रिपोर्ट

राजधानी देहरादून के नगर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत मच्छी बाजार (दूल्हा मार्केट के पास) में दिनांक 02 फरवरी 2026 को दिनदहाड़े हुई युवती की निर्मम हत्या के मामले में पुलिस की कथित लापरवाही अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। इस प्रकरण में सामाजिक, आरटीआई एवं मानवाधिकार एक्टिविस्ट भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी द्वारा उसी दिन दिनांक 02/02/2026 को उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग में तत्काल कार्रवाई हेतु शिकायत दर्ज करवाई गई थी।

शिकायत में बताया गया कि आरोपी द्वारा धारदार हथियार (चापड़) से युवती का गला रेतकर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। सबसे चिंताजनक तथ्य यह सामने आया कि मृतका ने घटना से दो दिन पूर्व ही आरोपी से अपनी जान को खतरा बताते हुए खुड़बुड़ा पुलिस चौकी में लिखित शिकायत दी थी, जिसमें आरोपी द्वारा पीछा करने और हत्या की धमकी देने का स्पष्ट उल्लेख था।

इसके बावजूद संबंधित चौकी प्रभारी प्रद्युम्न नेगी और पुलिस कर्मियों द्वारा न तो कोई प्रभावी कार्रवाई की गई और न ही आरोपी से पूछताछ तक की गई। यदि समय रहते आरोपी के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाती, तो संभवतः इस निर्दोष युवती की जान बचाई जा सकती थी। यह घटना भारतीय संविधान के जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) के गंभीर उल्लंघन के रूप में भी देखी जा रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड ने इस घटना का स्वतः संज्ञान (Suo-Motu) भी लिया है। आयोग के समक्ष प्रस्तुत शिकायत और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर यह तथ्य सामने आया कि 31 जनवरी 2026 को मृतका के परिजनों द्वारा आरोपी के खिलाफ शिकायत दिए जाने के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज करना तो दूर, आरोपी से पूछताछ करना भी आवश्यक नहीं समझा। आयोग ने इसे अत्यंत आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

आयोग ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस महानिदेशक, उत्तराखंड को नोटिस जारी कर निर्देश दिया है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी से इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए और उसकी विस्तृत आख्या आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

साथ ही आयोग ने संकेत दिए हैं कि शिकायत प्राप्त होने के बावजूद कार्रवाई न करने वाले जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों और कर्मियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर विभागीय एवं दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मानवाधिकार कार्यकर्ता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी ने आयोग से यह भी मांग की है कि मृतका के परिजनों को उचित मुआवजा और सुरक्षा प्रदान की जाए तथा राज्य पुलिस को भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

  • आयोग ने मामले की अगली सुनवाई हेतु 21 अप्रैल 2026 की तिथि निर्धारित की है, जिस दिन पुलिस विभाग को अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आयोग के निर्देशों पर होने वाली जांच से दोषी पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी तय होती है या नहीं और पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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