देहरादून:शराब की बोतल पर ₹730 MRP, वसूले ₹750
ओवररेटिंग की शिकायत पर मानवाधिकार आयोग सख्त, आबकारी आयुक्त को दोबारा नोटिस
शराब की बोतल पर ₹730 MRP, वसूले ₹750
ओवररेटिंग की शिकायत पर मानवाधिकार आयोग सख्त, आबकारी आयुक्त को दोबारा नोटिस
₹730 की शराब की बोतल के वसूले ₹750! Google Pay से दुकान के खाते में पहुंची रकम, मानवाधिकार आयोग ने आबकारी आयुक्त को फिर भेजा नोटिस
₹20 की ओवररेटिंग का मामला पहुंचा मानवाधिकार आयोग,22 अप्रैल को जारी हुआ था पहला नोटिस, जवाब नहीं मिलने पर आयोग ने दोबारा मांगी रिपोर्ट। 17 नवंबर तक कार्रवाई नहीं हुई तो पारित हो सकते हैं उचित आदेश
देहरादून:शराब की दुकानों पर निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली यानी ओवररेटिंग का मामला एक बार फिर सवालों के घेरे में है। देहरादून में ₹730 अंकित मूल्य वाली शराब की बोतल के लिए ₹750 वसूलने का मामला उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा। शिकायत पर आयोग ने आबकारी आयुक्त, देहरादून को नोटिस जारी किया, लेकिन निर्धारित समय तक जवाब प्रस्तुत नहीं होने पर आयोग ने दोबारा नोटिस जारी करते हुए सख्त रुख अपनाया है।
₹730 MRP, लेकिन भुगतान लिए ₹750
मामला 5 अप्रैल 2026 का है। सामाजिक, आरटीआई एवं मानवाधिकार एक्टिविस्ट भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी के अनुसार, उन्होंने देहरादून रिंग रोड स्थित 6 नंबर पुलिया के पास लाइसेंसी प्रवीन कुमार की अंग्रेजी शराब की दुकान से मैजिक मोमेंट्स वोदका की एक बोतल खरीदी थी।
बोतल पर ₹730 MRP अंकित था, जबकि दुकान पर उनसे ₹750 लिए गए। जब उन्होंने सेल्समैन से ₹20 अधिक लेने का कारण पूछा तो कथित तौर पर जवाब मिला कि दुकान पर इतनी ही कीमत है।
इस मामले में शिकायतकर्ता ने ₹750 का भुगतान Google Pay के माध्यम से दुकान पर उपलब्ध QR कोड स्कैन करके किया। भुगतान की डिजिटल रसीद में प्राप्तकर्ता का नाम English wine AND BEER SHOP दर्ज है। भुगतान 5 अप्रैल 2026 को शाम 6:06 बजे सफलतापूर्वक हुआ था।
इस प्रकार बोतल पर अंकित ₹730 और डिजिटल भुगतान ₹750 के बीच ₹20 का अंतर स्पष्ट दिखाई देता है। सवाल यह है कि जब बोतल पर ₹730 मूल्य अंकित था तो अतिरिक्त ₹20 किस आधार पर वसूले गए? क्या इस अतिरिक्त राशि का कोई वैध आधार था और क्या इसकी विधिवत बिक्री रसीद जारी की गई?
डिजिटल भुगतान का रिकॉर्ड और बोतल पर अंकित MRP इस शिकायत को प्रमाणों के साथ जांचने का आधार प्रदान करते हैं।
22 अप्रैल को मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
शिकायतकर्ता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी ने 7 अप्रैल 2026 को उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। आयोग ने मामले पर संज्ञान लेते हुए 22 अप्रैल 2026 को आबकारी आयुक्त, देहरादून को नोटिस जारी कर शिकायत के संबंध में आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पत्रावली 5 अगस्त 2026 को प्रस्तुत होनी थी।
5 अगस्त को भी नहीं मिली आख्या, कार्यवाहक अध्यक्ष ने दिए दोबारा निर्देश
उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष ने 5 अगस्त 2026 को आदेश पारित करते हुए स्पष्ट उल्लेख किया कि आबकारी आयुक्त, देहरादून की ओर से आख्या प्रस्तुत नहीं की गई है।
आदेश में निर्देश दिया गया कि नियत तिथि तक आख्या प्रस्तुत की जाए तथा पत्रावली 17 नवंबर 2026 को पेश हो।
आयोग की सख्त चेतावनी, आदेश का पालन नहीं हुआ तो पारित होंगे उचित आदेश
5 अगस्त 2026 को आबकारी आयुक्त को दोबारा नोटिस जारी किया गया।
इस नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आयोग के पूर्व आदेश की अपेक्षानुसार कार्यवाही नहीं किए जाने की स्थिति में आयोग विचारोपरांत यथोचित आदेश पारित कर देगा।
अब 17 नवंबर पर टिकी निगाहें
अब इस मामले में 17 नवंबर 2026 को पत्रावली आयोग के समक्ष प्रस्तुत होनी है। देखना होगा कि आबकारी विभाग निर्धारित समय तक अपनी आख्या प्रस्तुत करता है या नहीं और आयोग इस मामले में आगे क्या निर्णय लेता है।
जनहित में उठते बड़े सवाल
शराब की दुकानों पर MRP से अधिक वसूली आखिर क्यों हो रही है?
₹730 अंकित मूल्य वाली बोतल के लिए ₹750 किस आधार पर लिए गए?
डिजिटल भुगतान और बिक्री का लेखा-जोखा किस प्रकार दर्ज किया गया?
क्या संबंधित दुकान पर ओवररेटिंग की नियमित जांच की जाती है?
मानवाधिकार आयोग के नोटिस के बावजूद आबकारी विभाग की ओर से समय पर जवाब क्यों प्रस्तुत नहीं किया गया?
शिकायतकर्ता का पक्ष: भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी का कहना है कि यह मामला केवल ₹20 की अतिरिक्त वसूली का नहीं है, बल्कि आम उपभोक्ताओं के अधिकारों और शराब की दुकानों पर सरकारी नियमों के अनुपालन से जुड़ा है। विभाग को ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि आम जनता से निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली पर रोक लग सके।
अब देखना यह है कि आबकारी विभाग आयोग के समक्ष क्या जवाब प्रस्तुत करता है और ओवररेटिंग के इस मामले में क्या कार्रवाई होती है।
