Human Rights

दून अस्पताल में मानवता शर्मसार: आधार की मूल प्रति न होने पर बुजुर्ग महिला को नहीं मिली व्हीलचेयर,मानवाधिकार आयोग ने तलब की रिपोर्ट

दून अस्पताल में मानवता शर्मसार: आधार की मूल प्रति न होने पर बुजुर्ग महिला को नहीं मिली व्हीलचेयर, मानवाधिकार आयोग ने तलब की रिपोर्ट।

देहरादून:राजधानी देहरादून स्थित दून अस्पताल की ओपीडी में कर्मचारियों की अमानवीय और संवेदनहीन कार्यशैली का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि एक 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला को केवल इसलिए व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं कराई गई, क्योंकि उनके पास आधार कार्ड की मूल प्रति मौजूद नहीं थी, जबकि मोबाइल में आधार कार्ड दिखाया गया था।

शिकायत के अनुसार, लक्कड़मंडी, देहरादून निवासी शाहनवाज दिनांक 02 नवंबर 2025 को सुबह करीब नौ बजे अपनी बुजुर्ग मां श्रीमती मुन्नी को गिरने से कूल्हे में आई गंभीर चोट के कारण दून अस्पताल लेकर पहुंचे थे। महिला दर्द से कराह रही थी और चलने में असमर्थ थी। ओपीडी के भूतल पर मौजूद कर्मचारियों से व्हीलचेयर की मांग की गई, लेकिन कर्मचारियों ने आधार कार्ड की मूल प्रति मांगी।

युवक द्वारा मोबाइल में आधार कार्ड दिखाने और काफी देर तक विनती करने के बावजूद कर्मचारियों ने व्हीलचेयर देने से साफ इनकार कर दिया। मजबूर होकर बेटे को अपनी मां को गोद में उठाकर पहले एक्सरे जांच के लिए प्रथम तल और फिर हड्डी रोग विशेषज्ञ को दिखाने के लिए दूसरे तल तक ले जाना पड़ा। इस दौरान एक्सरे प्रक्रिया में करीब डेढ़ घंटे का समय लगा और बुजुर्ग महिला लगातार दर्द से कराहती रही।

इस पूरे घटनाक्रम को मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन बताते हुए शिकायतकर्ता छात्रा सृष्टि द्वारा उत्तराखण्ड मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई।

आदेश

Oplus_16908288

 

शिकायतकर्ता ने देहरादून के दून अस्पताल की ओ०पी०डी० में कर्मचारियों का बेहद संवेदनशील होना, एक बुजुर्ग महिला को व्हीलचेयर सिर्फ इसलिए न देने क्यूंकि उसके पास मूल कॉपी में आधार कार्ड नहीं था तथा तत्काल कार्यवाही कराये जाने के सम्बन्ध में शिकायत प्रस्तुत की है।

आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को शिकायत की प्रति भेजते हुए निर्देश दिए हैं कि वे इस संबंध में अपनी आख्या निर्धारित तिथि तक आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें।

आयोग के सदस्य राम सिंह मीना द्वारा पारित आदेश में कहा गया है कि मामले की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह घटना सरकारी अस्पतालों में मरीजों विशेषकर बुजुर्गों और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता की कमी को उजागर करती है। अब देखना यह है कि अस्पताल प्रशासन और आयोग की जांच में क्या कार्रवाई होती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button