विशेष

अशोक वर्मा एक व्यक्तित्व,जनहित में किए गए उल्लेखनीय कार्य

अशोक वर्मा एक व्यक्तित्व,उत्तराखंड पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष श्री अशोक वर्मा द्वारा जनहित में किए गए उल्लेखनीय कार्य

देहरादून, 02 सितंबर 2025: उत्तराखंड अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष और देहरादून निवासी श्री अशोक वर्मा ने अपने कार्यकाल के दौरान समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनके प्रयासों ने उत्तराखंड में सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

*#जाति सर्वेक्षण और ओबीसी सूची में समावेशन#*

श्री अशोक वर्मा ने उत्तराखंड में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की जातियों की पहचान और उनके कल्याण के लिए ठोस कदम उठाए। 2015 में, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) के सहयोग से, उन्होंने उत्तराखंड की धीमान, राजभर, और तंवर हिंगड़िया जातियों को राष्ट्रीय ओबीसी सूची में शामिल करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस प्रक्रिया के लिए, उन्होंने राज्य के विभिन्न जिलों से जाति सर्वेक्षण की रिपोर्ट मंगवाने पर जोर दिया, हालांकि उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि केवल हरिद्वार के जिलाधिकारी ने ही समय पर सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जबकि अन्य जिलों से बाद में रिपोर्ट प्राप्त हुई। इस प्रयास ने कई समुदायों को सरकारी नौकरियों, शैक्षिक संस्थानों में आरक्षण, और केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में मदद की।

*#सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए प्रयास#*

श्री वर्मा ने उत्तराखंड अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के माध्यम से सामाजिक, आर्थिक, और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के सर्वांगीण विकास के लिए कई योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन पर बल दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचे। उनके नेतृत्व में आयोग ने पिछड़े वर्गों की शिकायतों को सुनने और उनके समाधान के लिए राज्य सरकार को सलाह देने का कार्य किया।

*#पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर#*

अपने कार्यकाल के दौरान, श्री वर्मा ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए। उन्होंने नौकरशाही को और चुस्त दुरूत बनानेँ, अधिकारियों को समयबद्ध और प्रभावी कार्यवाही के लिए प्रेरित किया। उनकी यह पहल सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी, जिसने कई लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया।

जनहित में अन्य योगदान

श्री अशोक वर्मा ने देहरादून में सामुदायिक विकास और जनहित के लिए विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की। उनके कार्यकाल में आयोग ने कई शिकायतों का निपटारा किया और समाज के कमजोर वर्गों के लिए नीतिगत सुझाव दिए। उनकी सक्रियता ने न केवल ओबीसी समुदायों को बल्कि अन्य वंचित वर्गों को भी लाभ पहुंचाया।

*#वर्तमान संदर्भ#*

वर्तमान में उत्तराखंड अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय नेगी हैं, जिन्होंने 2023 में आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन राज्यपाल को सौंपाऔर वे भी निरंतर अपना काम कर रहे हैं। हालांकि, श्री अशोक वर्मा का योगदान आज भी समाज के लिए प्रेरणादायक है। उनके द्वारा शुरू किए गए कार्यों ने उत्तराखंड में सामाजिक समावेशन और समानता की दिशा में एक मजबूत नींव रखी।

श्री अशोक वर्मा के प्रयासों ने न केवल पिछड़े वर्गों के अधिकारों को मजबूती प्रदान की, बल्कि समाज में समानता और न्याय के सिद्धांतों को भी बढ़ावा दिया। उनकी यह विरासत उत्तराखंड के सामाजिक ढांचे में लंबे समय तक याद की जाएगी।

*#जनहित में किए गए प्रमुख कार्य#*

1- जाति प्रमाणपत्रों की अवधि 1 वर्ष से तीन वर्ष तक बढ़ाए जाने के लिए कई बार प्रस्ताव शासन और सरकार को भेजा।

अशोक वर्मा ने बताया कि उत्तराखंड सरकार ने पिछड़ा वर्ग के जाति प्रमाणपत्र की मान्य अवधि को एक वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दिया है। साथ ही उन्होंने क्रीमी-लेयर की आय सीमा रु 6 लाख से रु 10 लाख करने, वजीफ़ा पात्रता की आय सीमा बढ़ाने और 16 जातियों को केंद्रीय सूची में शामिल करने हेतु राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को प्रस्ताव भेजे थे ।

2- OBC समुदाय की व्यापक सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण योजनाएँ

विकासखंड लक्सर (हरिद्वार) में एवं अनेक अन्य स्थानों पर जा जा कर आयोजित शिविरोँ में वर्मा ने जन समस्याएँ सुनीं। आयोग की ओर से आरक्षण को 14 % से बढ़ा कर और अधिक करने की संतुति आयोग से समय समय पर सरकार और शासन को अपने कार्यकाल में भेजी।

विशिष्ट पिछड़ी जातियों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलवाने के लिये देहरादून में पिछड़ा वर्ग आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष जस्टिस ऐश्वर्या के तत्वाधान में एक बड़ी अदालत का आयोजन जिसमें राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष समेत सभी सदस्य गणों ने हिस्सा लेकर पिछला वर्ग के लोगों की समस्याओं को सुना और जाना।

आय आधार सीमा बढ़ाने जैसी सिफारिशें सरकार को भेजीं ।

3- शिक्षा क्षेत्र में अल्पकालीन संरक्षण

सितंबर 2024 में उन्होंने सेंट जोसेफ स्कूल, देहरादून के खेल मैदान के अधिग्रहण पर चिंता जताई। उनका कहना था कि यह निर्णय छात्रों के खेल एवं समग्र विकास से खिलवाड़ था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा इस फैसले को वापस लेने के आदेश जारी किए जाने पर वर्मा ने उनका आभार व्यक्त किया ।

4- मौजूदा सरकार एवं युवाओं के प्रति विश्वास

मार्च 2024 को वे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रशंसा करते हुए बोले कि सख्त नकल विरोधी कानून, पारदर्शी भर्ती पद्धति, क्षैतिज आरक्षण और निवेश सम्मेलनों जैसी पहलें युवाओं के लिए बेहद सकारात्मक रही हैं। उन्होंने इसके तहत हजारों युवाओं को रोजगार प्राप्त हुए होने और राज्य की प्रगति हेतु इन पहलों को ऐतिहासिक बताया ।

5- भाजपा में शामिल होकर जनसेवा जारी

फ़रवरी 2024 में अशोक वर्मा, जिन्होंने लंबे समय तक कांग्रेस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, भाजपा में शामिल हुए। उन्होंने यह कदम जनहित की दिशा में और प्रभावी मंच से काम करने की इच्छा के रूप में अपनाया। देहरादून नगर निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और OBC आयोग के पूर्व अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने अपने अनुभव और सामाजिक जुड़ाव को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

श्री अशोक वर्मा की अध्यक्षता में पिछड़ा वर्गों को आरक्षण, वजीफा, प्रमाणपत्र सहित अहम प्रशासनिक लाभ दिए गए,

शिक्षा संस्थानों की जमीन व बच्चों के हितों की रक्षा हेतु हस्तक्षेप किया गया,

युवाओं एवं सरकारी योजनाओं के प्रति विश्वास बढ़ाया गया और राजनीति परिवर्तन के बावजूद जनहित की सेवा जारी रखी गई। उस समय चल रहा है राज्य आंदोलन में पूर्व विधायक आंदोलन के अग्रज स्वर्गीय रणजीत सिंह वर्मा आंदोलनकारी नेत्री स्वर्गीय श्रीमती सुशीला बालोनी के साथ बढ़कर का हिस्सा लिया और कई बार पुलिस से छुपकर फरारी काटी। वेँ उत्तराखंड राज्य बनाए जाने के प्रबल समर्थक रहे।

 रेलवे द्वारा नामित रेलवे परामर्श दात्रि समिति के सदस्य रहते हुए उन्होंने अनेक उपयोगी सुझाव समय रेलवे विभाग को दिए।

  दो बार नगर पालिका के सभासद के रूप में और दो बार नगर निगम में पार्षद के रूप में चुनाव जीत कर उन्होंने अपनी अद्भुत सेवाएं इस शहर को दी जिन्हें लोग आज भी स्मरण करते हैं।

Related Articles

Back to top button