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भूमि धोखाधड़ी में दून के कारोबारी बाप-बेटे अमरीश और प्रणव ओबेरॉय भेजे गए जेल

देहरादून में भूमि धोखाधड़ी का बड़ा खुलासा: बाप-बेटे अमरीश और प्रणव ओबेरॉय जेल भेजे गए

देहरादून, 16 जून 2025: देहरादून पुलिस ने भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए एक बड़े भूमि धोखाधड़ी मामले में कारोबारी अमरीश कुमार ओबेरॉय और उनके बेटे प्रणव ओबेरॉय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। दोनों पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बैंक में बंधक जमीन को बेचकर 1 करोड़ 26 लाख 50 हजार रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। एसएसपी देहरादून अजय सिंह की सख्ती का असर भू-माफियाओं पर साफ दिख रहा है।

कोतवाली नगर में वादी वर्णित अग्रवाल, निवासी विष्णु विहार, विकासनगर, देहरादून, ने शिकायत दर्ज की थी कि उन्हें अपना रोजगार शुरू करने के लिए जमीन की आवश्यकता थी। उनके परिचित विजय सिंह परमार ने उनकी मुलाकात अमरीश ओबेरॉय, प्रणव ओबेरॉय और श्रवण ओबेरॉय से करवाई। अभियुक्तों ने वर्णित को कुआंवाला क्षेत्र की एक जमीन की फर्जी फर्द उपलब्ध कराई और दावा किया कि जमीन पर कोई बैंक लोन या विवाद नहीं है। इसके आधार पर 1 करोड़ 26 लाख 50 हजार रुपये में सौदा तय हुआ, और रकम लेकर अभियुक्तों ने वर्णित के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री करवा दी।

हालांकि, जब वर्णित ने दाखिल-खारिज के लिए आवेदन किया, तो पता चला कि उक्त जमीन पर अमरीश, प्रणव और श्रवण ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से पहले ही लोन ले रखा था। अभियुक्तों ने योजनाबद्ध तरीके से कूटरचित दस्तावेजों के जरिए वर्णित को ठगा और रकम हड़प ली।

वादी की शिकायत पर कोतवाली नगर में मुकदमा संख्या 510/24, धारा 120बी/420/467/468/471 भादवि के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने विवेचना के दौरान साक्ष्य जुटाए और 16 जून 2025 को अमरीश कुमार ओबेरॉय और प्रणव ओबेरॉय को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण:

अमरीश कुमार ओबेरॉय, पुत्र सरदारी लाल ओबेरॉय, निवासी 2ए, रेस कोर्स, हरिद्वार रोड, नेहरू कॉलोनी, देहरादून

प्रणव ओबेरॉय, पुत्र अमरीश कुमार ओबेरॉय, निवासी 2ए, रेस कोर्स, हरिद्वार रोड, नेहरू कॉलोनी, देहरादून

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है, और अन्य संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी अजय सिंह ने कहा कि भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान तेज रहेगा, ताकि ऐसी धोखाधड़ी की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।

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